नर्मदा रहे निर्मल और अविरल….

मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली मां नर्मदा के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने ‘निर्मल एवं अविरल मां नर्मदा मिशन’ यानी ‘नमन मिशन’ को मंजूरी देकर एक महत्वपूर्ण पहल की है. नदी संरक्षण को केवल धार्मिक आस्था या सरकारी परियोजना के दायरे से बाहर निकालकर पर्यावरणीय सरोकार के रूप में देखने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी. इस दृष्टि से नमन मिशन का उद्देश्य और इसकी कार्ययोजना उम्मीद जगाती है.

नर्मदा केवल एक नदी नहीं है. यह मध्य प्रदेश की कृषि, पेयजल, जैव विविधता, अर्थव्यवस्था और संस्कृति से गहराई से जुड़ी है. इसके किनारे बसे गांवों और शहरों की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस नदी पर निर्भर है. ऐसे में नर्मदा के जल का प्रदूषित होना केवल पर्यावरण का संकट नहीं, बल्कि मानव जीवन और आने वाली पीढिय़ों के भविष्य का संकट भी है.नमन मिशन के तहत नदी में मिलने वाले गंदे पानी और कचरे को रोकने, प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने तथा तटों का वैज्ञानिक विकास करने पर जोर दिया गया है. यह तीनों लक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. केवल घाटों को सुंदर बना देने से नदी स्वच्छ नहीं होगी और केवल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा देने से उसका प्राकृतिक प्रवाह सुनिश्चित नहीं होगा. नदी को एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र मानकर समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा. इस मिशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जीआईएस जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल प्रस्तावित है. यह स्वागतयोग्य कदम है. तकनीक के माध्यम से जल की गुणवत्ता, प्रदूषण के स्रोत, तटीय क्षेत्रों में बदलाव और नदी के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा सकती है. लेकिन तकनीक तभी प्रभावी होगी, जब उसके आधार पर समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित हो. निगरानी के आंकड़े केवल सरकारी फाइलों में दर्ज होकर न रह जाएं, बल्कि उनका सार्वजनिक उपयोग और जवाबदेही भी तय हो.मिशन के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपए तथा कैम्पा निधि से 100 करोड़ रुपए जुटाने का प्रावधान किया गया है. 200 करोड़ रुपए सालाना का यह निवेश नर्मदा के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है. हालांकि असली चुनौती धन खर्च करने से अधिक उसके सही उपयोग की है. सीवेज प्रबंधन, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण, नदी के कैचमेंट क्षेत्र का संरक्षण, तटों पर हरित पट्टी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश जैसे कामों को प्राथमिकता देनी होगी.सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नर्मदा संरक्षण को केवल सरकार का अभियान न बनाया जाए. स्थानीय निकायों, ग्राम पंचायतों, किसानों, उद्योगों, धार्मिक संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी इसके लिए अनिवार्य है. नदी में कचरा न डालना, पूजा सामग्री के लिए उचित व्यवस्था करना और जलस्रोतों के आसपास हरियाली बचाना नागरिक जिम्मेदारी भी है.नर्मदा को बचाना वास्तव में मध्य प्रदेश के पर्यावरण और भविष्य को बचाना है. ‘नमन मिशन’ की सफलता का पैमाना सुंदर घाट या खर्च की गई राशि नहीं, बल्कि वह दिन होगा जब नर्मदा का पानी निर्मल हो, प्रवाह अविरल हो और उसके दोनों तट जैव विविधता से समृद्ध हों. नदी को मां कहने की हमारी परंपरा तभी सार्थक होगी, जब उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी भी उतनी ही निर्मल और अविरल हो.

 

 

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