सरई :चिलचिलाती धूप में सरई तहसील के जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ाई का काम जोर पकड़ चुका है। सुबह सूरज निकलने से पहले ही गांव के महिला-पुरुष, बच्चे-बूढ़े सब जंगल की ओर निकल पड़ते हैं।तपती धूप और लू के थपेड़ों के बीच संग्राहक एक-एक पत्ता चुनकर तोड़ते हैं। बीड़ी बनाने के लिए वही पत्ता काम आता है जो साफ हो, कहीं से फटा न हो, कीड़े का निशान न हो। दिनभर मेहनत के बाद 50-50 पत्तों की गड्डी बांधी जाती है।
तस्वीर में दिख रहा है कि जंगल से तोड़कर लाए गए पत्तों को खुले मैदान में फैलाकर सुखाया जा रहा है। महिला-पुरुष मिलकर पत्तों को छांट रहे हैं और बोरों में भर रहे हैं। इसके बाद इन्हें वन विभाग के फड़ में जमा किया जाएगा। जंगल से लगे ग्रामीण इलाकों में लोग पूरे साल महुआ और तेंदूपत्ते का इंतजार करते हैं। मार्च से महुआ टपकना शुरू होता है और अप्रैल-मई में तेंदूपत्ता। यही दो चीजें यहां के गरीब परिवारों की आय का सबसे बड़ा जरिया हैं।
इसी की कमाई से बच्चों की स्कूल फीस, शादी-ब्याह का खर्च और त्योहार-तिहार का इंतजाम होता है। सिंगरौली के जंगली इलाकों में पूरा गांव इसी सीजन पर टिका रहता है। गांव की संग्राहक महिला गीता बाई ने बताया कि सुबह 4 बजे उठकर रोटी बांधते हैं और जंगल चले जाते हैं। दोपहर तक 80 से 100 गड्डी हो जाती है। धूप ऐसी लगती है जैसे आसमान से आग बरस रही हो, लेकिन मजबूरी है। इसी से तो घर चलता है। फिलहाल वन विभाग के फड़ में पत्ता खरीदी शुरू हो गई है। संग्राहकों को उम्मीद है कि इस बार रेट अच्छा मिलेगा क्योंकि महंगाई बहुत बढ़ गई है।
