दिल्ली डायरी
प्रवेश कुमार मिश्र
केरल विधानसभा चुनाव में बहुत हासिल करने के बाद भी कांग्रेसी रणनीतिकार मुख्यमंत्री के नाम पर एक राय बनाकर निर्णय करने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं. कांग्रेस के अंदर इस तरह के अनिश्चिततापूर्ण निर्णय को लेकर दूसरे दलों व समूहों की ओर से चौतरफा राजनीतिक हमला किया जा रहा है. चर्चा है कि कांग्रेस अपने तीन क्षत्रपों के द्वंद्व के कारण अंतर्द्वंद्व व ऊहापोह की स्थिति में फंसी हुई है.
एक क्षत्रप पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी के सबसे विश्वासपात्र हैं तो दूसरे गठबंधन सहयोगियों के पसंदीदा हैं . तीसरे क्षत्रप अपने अनुभव व वरिष्ठता को आधार बनाकर चुपचाप अपनी गोटी सेट करने के फिराक में हैं. हालांकि पिछले दिनों केरल में चले आंतरिक पोस्टरवार से पार्टी को हास्यास्पद स्थिति में आना पड़ गया था लेकिन कांग्रेस केन्द्रीय नेतृत्व के सख्त निर्देश के बाद फिलहाल पोस्टर युद्ध सुस्त पड़ा है परन्तु अभी भी शीतयुद्ध जारी है. पार्टी नेतृत्व के इस हालात से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी हैरत में हैं.
इंडिया गठबंधन का पुनर्गठन या पूर्णविराम
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद की राजनीति परिस्थितियों को आधार बनाकर इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा इंडिया गठबंधन के अस्तित्व व भविष्य को लेकर हो रही है. तमिलनाडु में कांग्रेसी रूख से नाराज़ इंडिया गठबंधन के सबसे विश्वासपात्र साथी डीएमके ने जिस तरह से गठबंधन से अलग होने की घोषणा की है उससे इसके भविष्य का आंकलन किया जा सकता है. इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी द्वारा जिस तरह चुप्पी साधी गई है और सपा नेतृत्व द्वारा ममता के साथ हमदर्दी दिखाई गई है उससे साफ है कि केन्द्रीय राजनीति में कुछ उलटफेर दिखेगा. हालांकि राजद, शिवसेना(उद्धव), एनसीपी(शरद), जेएमएम द्वारा केन्द्रीय स्तर पर सुलह के साथ इंडिया गठबंधन के पुनर्गठन की योजना बनाई जा रही है लेकिन कुछ लोग इंडिया गठबंधन के भविष्य को अब इसे पूर्णविराम के रूप में देखने लगे हैं.
मोदी की अपील से उलझने बढ़ी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अति व्यय पर नियंत्रण करने की अपील के संदर्भ को लेकर लोग उलझन में पड़ गए हैं. कुछ लोग इसे भविष्य में आने वाले आर्थिक संकट की चेतावनी के रूप में देख रहे हैं तो कुछ लोग इसे हालात का अंदाजा लगाने में देर कर चुकी सरकार द्वारा हड़बड़ी में उठाए गए कदम का परिचायक मान रहे हैं. मोदी के अपील के बाद न सिर्फ शेयर बाजार बल्कि सामान्य मंडियों में भी हलचल बढ़ी हुई है.
सरकार के लोग भले ही इस अपील से होने वाले फायदों का पूरा अंकगणितीय ब्योरा देते हुए समय पर उठाया गया बेहतर कदम बता रहे हैं लेकिन विपक्षी दलों व राजनीतिक विश्लेषक के निशाने पर सरकार है. विपक्षी इसे सरकार की कमजोरी का परिचायक मान रहे हैं तो विश्लेषक इस अपील के कारण समाज व रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने वाले बहुस्तरीय प्रभाव का आंकलन कर नीतिगत फैसलों पर दोष मढ़ रहे हैं. कोरोना काल से तुलना करने के कारण आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए हलचलें बढ़ी हुई है.
मिशन उत्तर प्रदेश में जुटे भाजपाई
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है. दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपाई अब मिशन उत्तर प्रदेश को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. क्योंकि केन्द्रीय मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल में भी उत्तरप्रदेश के जातीय व क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखकर कुछ नए लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. इतना ही नहीं पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में भी उत्तरप्रदेश के नेताओं को विशेष महत्व के साथ शामिल करने की भी चर्चा हो रही है
