
जावरा। । हाल ही में रतलाम जिला जेल से एक गंभीर मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी ने आरोप लगाया है कि उसके साथ जेल के ही एक अन्य कैदी ने कुकर्म (दुष्कर्म) किया है। पीडि़त कैदी ने जेल प्रशासन को शिकायत दी कि बैरक में मौजूद एक बंदी ने उसके साथ जबरदस्ती की। लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।
जेल में उसके साथ हुई घटना की जानकारी जब पीड़ित ने उसके पिता को बताई तो पिता वकील के मार्फत न्यायालय की शरण में गए। न्यायालय ने तुरंत ही पीड़ित का मेडिकल बोर्ड से कराने और उसके कथन मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट रतलाम के समक्ष करने के आदेश दिए। आदेश के बाद जेल प्रशासन के भीतर हडक़ंप मचा हुआ है। जेल प्रशासन ने भी आंतरिक जांच शुरू कर दी है ताकि सुरक्षा में चूक के कारणों का पता लगाया जा सके। जेलों में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मानवाधिकार आयोग और जेल नियमावली के तहत सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी के कड़े निर्देश होते हैं, फिर भी ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। पूरा मामला यह है की जावरा शहर पुलिस थाने के द्वारा बनाए गए 8/18 एनडीपीएस के प्रकरण में 12 वीं क्लास के आरोपी जिसे कोर्ट द्वारा जिला जेल रतलाम भेजा गया था। जिला जेल रतलाम में उसके साथ उसी के बैरक में रहने वाले केदी ने ही आप्राकृतिक कृत किया। जिसे जिला जेल प्रशासन द्वारा दबाने का प्रयास किया गया। लडक़े ने बैरक में हुए घटनाक्रम जब अपने पिता को बताया तो उसके पिता अभिभाषक के साथ मिलने गए। तब जानकारी मिली कि उसके साथ गलत काम हुआ है। इस पर उसके पिता द्वारा कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत किया। जिस पर कोर्ट विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस द्वारा लडक़े का तुरंत मेडिकल बोर्ड से और बोर्ड न बैठने की दशा में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से परीक्षा कराई जाने के सख्त आदेश दिए। और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रतलाम के समक्ष उसके कथन करानें और रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
न मजिस्ट्रेट मिले ना ही डॉक्टर
विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस का सुबह आदेश निकलते ही शनिवार शाम को जिला जेल प्रशासन आनन-फानन में पीडित को लेकर मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट के समक्ष कथन कराने पहुंचा। समय निकलने के चलते मजिस्ट्रेट नहीं मिल पाए। इधर बोर्ड से मेडिकल कराने के लिए जिला जेल प्रशासन जब जिला अस्पताल पीडित को लेकर पहुंचे तो यहां भी बोर्ड के सदस्यों और डॉक्टर शाम होने के चलते नहीं मिल पाए। अब पीडित का सोमवार को मेडिकल और न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उसके कथन होंगे।
