कागजों पर आदर्श लेकिन नलों में पानी नहीं, जल जीवन मिशन के कार्यों का हिसाब दे सरकार: पटवारी

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जल जीवन मिशन को लेकर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में “हर घर नल से जल” योजना भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। उन्होंने देवास जिले के चिरावत गांव की स्थिति को इसका बड़ा उदाहरण बताया।

भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए पटवारी ने कहा कि कागजों में “आदर्श ग्राम” घोषित चिरावत गांव आज भी भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। गांव की महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज के खेतों और अन्य स्थानों से डिब्बों में पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना की “जमीनी हकीकत” उजागर करती है।

पटवारी ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि वर्ष 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना के लिए हजारों करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद अनेक गांवों में पाइपलाइन अधूरी पड़ी हैं, पानी की टंकियां बंद हैं और नलों में पानी नहीं पहुंच रहा है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चिरावत गांव से सामने आए एक वीडियो में महिलाएं और बच्चे पानी के लिए संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में योजना को पूर्ण बताया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई जिलों में घटिया निर्माण, क्षतिग्रस्त ढांचे और भुगतान में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जल संकट से प्रभावित गांवों का तत्काल सर्वे कराने, जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों की स्वतंत्र जांच कराने तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।

 

 

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