तेहरान, 30 अप्रैल (वार्ता) ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर गालिबाफ ने गुरुवार को ईरान के तेल निर्यात को रोकने के अमेरिकी प्रयासों के प्रभाव को खारिज करते हुए कहा कि बढ़ते दबाव के बावजूद देश का ऊर्जा बुनियादी ढांचा अप्रभावित है। श्री गालीबाफ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि कथित नाकेबंदी के बाद भी तेल उत्पादन में कोई व्यवधान नहीं आया है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान का उल्लेख करते हुए लिखा, “तीन दिन हो गये, कोई तेल का कुआं नहीं फटा। जरूरत पड़ने पर ईरान 30 दिनों तक परिचालन जारी रख सकता है।”
ईरानी संसद के अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि ईरान की तेल बिक्री को प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से किये गये अमेरिकी उपायों ने देश की भंडारण क्षमता को उसकी सीमा तक नहीं धकेला है। इसके बजाय, उन्होंने तर्क दिया कि इन प्रतिबंधों ने वैश्विक तेल कीमतों में भारी वृद्धि में योगदान दिया है। अमेरिकी प्रशासन पर निशाना साधते हुए श्री गालिबाफ ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट सहित अधिकारियों की आलोचना की और उन पर त्रुटिपूर्ण आकलन पर भरोसा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “वे नाकाबंदी के सिद्धांत को आगे बढ़ा रहे हैं और तेल की कीमतों को 120 डॉलर तक ले गये हैं। अगला पड़ाव 140 डॉलर है। मुद्दा सिद्धांत का नहीं, बल्कि मानसिकता का है।” अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया कि ईरान की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी महीनों तक चल सकती है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आपूर्ति में और व्यवधान की आशंका बढ़ गयी है। श्री ट्रंप का मानना है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी से ईरान पर दबाव बनेगा और वह इसे बमबारी से अधिक प्रभावी बताते हैं। उन्होंने अमेरिकी उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव को सीमित करते हुए इसे विस्तार
देने के उपायों पर चर्चा की।
श्री ट्रंंप ने ईरान की जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को ‘शानदार’ बताया और कहा कि यह अमेरिकी सैन्य शक्ति को प्रदर्शित करता है तथा ईरान को झुकने के लिए मजबूर करेगा। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब तक ईरान परमाणु हथियारों की किसी भी कोशिश को छोड़ नहीं देता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है। श्री ट्रंप ने इस ऑपरेशन को ‘100 प्रतिशत अचूक’ बताते हुए अमेरिकी नौसेना की प्रशंसा की और दावा किया कि उनके पहले कार्यकाल के दौरान और उसके बाद सेना को काफी मजबूत किया गया है। उन्होंने यह भीदावा किया कि अमेरिकी शक्ति ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को पहले ही बेअसर कर दिया है।
अन्य देशों के साथ तुलना करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान दबाव में तेजी से ढह जाएगा और सुझाव दिया कि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी है। उनके अनुसार, आर्थिक और सैन्य दबाव के सामने ईरान के पास अंततः ‘हार मानने’ के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। कूटनीति पर श्री ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन यह व्यक्तिगत बैठकों के बजाय फोन के माध्यम से हो रही है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोई भी संभावित समझौता ईरान द्वारा परमाणु हथियारों की महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह से त्यागने पर निर्भर होगा। उन्होंने कहा कि इस शर्त के बिना ‘कभी कोई समझौता नहीं होगा।’

