चयन प्रकिया निरस्त तो फिर उसे चुनौती देने का कोई औचित्य नहीं: हाईकोर्ट

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि जब दूषित होने के कारण पूरी चयन प्रक्रिया ही निरस्त हो गई और कोई भी उम्मीदवार प्रभावित नहीं हुआ, तो उसे चुनौती देने का कोई औचित्य नहीं है। इस मत के साथ जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने उम्मीदवारों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें चयन प्रक्रिया को निरस्त करने को चुनौती दी गई थी। मामला सहायक प्रबंधक से समिति प्रबंधक के पद पर चयन से जुड़ा है।

दरअसल, शहडोल जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में उक्त पद पर पदस्थापना के लिए चयन सूची जारी की गई थी। शिकायत पर जांच के बाद बैंक के सीईओं ने उक्त सूची निरस्त कर दी गई थी। शहडोल के अशोक मिश्रा सहित 19 लोगों ने निरस्त करने के आदेश को चुनौती दी। वहीं आपत्तिकर्ता मनीष श्रीवास्तव की ओर सेे वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल एवं निशांत मिश्रा ने दलील दी कि जांच के बाद प्रक्रिया निरस्त की गई है। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं के पास विभाग में अपील करने का प्रावधान भी मौजूद है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता आगामी चयन प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।

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