नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (वार्ता) भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुयी मुक्त व्यापार संधि (एफटीए) का स्वागत करते हुए कपड़ा मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि इससे भारतीय कपड़ों और परिधानों के न्यूजीलैंड में निर्यात के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे।
मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “वस्त्र मंत्रालय इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते का स्वागत करता है, जो विश्वास, विकास और साझा समृद्धि पर आधारित भविष्य के लिए तैयार साझेदारी को दर्शाता है।”
इसमें कहा गया है कि न्यूजीलैंड का बाजार भारत के वस्त्र, परिधान और तैयार उत्पादों के निर्यात के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करता है।
मंत्रालय के अनुसार, न्यूजीलैंड हर साल 33 करोड़ डॉलर के कपड़े, 1.27 अरब डॉलर के परिधान और 33 करोड़ डॉलर के दूसरे तैयार उत्पादों का आयात करता है। न्यूजीलैंड की आबादी 53 लाख है जो बड़े शहरी केंद्रों के आसपास केंद्रित है। वहां प्रति व्यक्ति आय लगभग 52,000 डॉलर है और उच्च मूल्य के निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
न्यूजीलैंड के कुल वैश्विक आयात में परिधान क्षेत्र की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है। ज्यादातर आयात कैजुअल वियर (जींस, टी-शर्ट, हुडी, आरामदायक टॉप, कैजुअल ड्रेस), जैकेट, फॉर्मल वियर और स्पोर्ट्स वियर का होता है। इन आयातों में सूती परिधान की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है, जबकि कृत्रिम रेशों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है।
न्यूजीलैंड को भारत का द्विपक्षीय निर्यात 65 करोड़ डॉलर है, जिसमें वस्त्र क्षेत्र का योगदान 10 करोड़ डॉलर है। पिछले दशक में न्यूजीलैंड को वस्त्र, परिधान और तैयार वस्त्र का भारत से निर्यात बढ़ा है। परिधान, रेडीमेड वस्त्र, कालीन, रेशा, धागा और कपड़ा जैसे सभी उप-क्षेत्रों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गयी है। भारतीय निर्यात के लिए विकास के कुछ संभावित क्षेत्र परिधान, तैयार वस्त्र, कालीन, रेशा, धागा, कपड़ा, हस्तशिल्प और हथकरघा हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि एफटीए से वस्त्र डिजाइन और फैशन प्रौद्योगिकी में सहयोग के द्वार भी खुलते हैं। प्रमुख वस्त्र मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेकर इस एफटीए का लाभ उठाना आवश्यक है। न्यूजीलैंड एक महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है और एफटीए से भारत को अपने निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
