
महाकौशल की डायरी अविनाश दीक्षित। मर्यादा, आचरण, अनुशासन और बोली की शैली…इन सभी की धज्ज्यिां जब 2200 करोड़ के बजट को पारित करने के दरम्यान नगर निगम मुख्यालय के सभाकक्ष में उड़ी तो चर्चाओं का बाजार पूरे शहर में गर्म हुआ। यह सालों के नगर निगम इतिहास में संभवत: पहली बार हुआ जब नौबत हाथापाई तक की नजर आने लगी। जहां एक ओर कांग्रेस के गलियारों में सत्ता पक्ष को लेकर जमकर आरोप लगाए गए तो वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष द्वारा विकास कार्यों के तमाम दावे पेश किए गए। लेकिन जो बदनामी सदन बैठक की होनी थी उसे कोई नहीं रोक पाया। 3 दिन चली सदन की बैठक में निगम अध्यक्ष के हस्तक्षेप से सांतवे आसमान पर पहुंचा गुस्सा बमुश्किल धरातल पर आया । इस दौरान सत्ता और विपक्ष के सभी पार्षद अपना-अपना दामन बचाते नजर आए। हुआ यूं कि सदन बैठक में शहर के प्रथम नागरिक जगत बहादुर सिंह अन्नू ने कांग्रेस के पार्षदों और नेता प्रतिपक्ष से यह कह दिया कि कौन कितने पानी में है हमें सब पता है, कहीं मैंने नाम ले लिया तो दिक्कत में आ जाओगे। जिसके बाद कांग्रेस पार्षदों और नेता प्रतिपक्ष अमरीश ने तीखी नोंकझोंक करते हुए गहमा गहमी बना दी। सदन में नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा द्वारा महापौर को दी गई खुली चुनौती की चर्चा भी शहर में काफी रही, जिसमें उन्होनें दो टूक कहा था कि जिसको जो कुछ करना है कर ले, हमें जो करना होगा हम करेंगे। उधर भाजपा पार्षद जीतू कटारे सहित अन्य पार्षदों ने तो ये तक कह दिया था कि सदन के भीतर उपयोग किए गए कांग्रेस पार्षदों के असंसदीय वाक्य कांग्रेस को पाताल में ले जाने के लिए पर्याप्त हैं।
निगम मंडलों की वायरल सूची बनी सियासती जंग का मुद्दा…
निगम- मंडलों में किसे क्या जिम्मेदारी मिली है इसकी सोशल मीडिया में एक सूची वायरल हुई तो राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। यद्यपि ये खबर भी पुख्ता है कि निगम मंडल की सूची अभी हाई कमान के द्वारा होल्ड कर दी गई है। हैरानी की बात ये थी कि जिनके नाम सोशल मीडिया पर वायरल सूची में चल रहे हैं उनसे अभी तक बायोडाटा तक नहीं बुलाया गया है। ऐसे में जिनके नाम सूची में हैं वे खुद सकते में हैं और भाजपा के अपने अपने दिग्गज नेताओं के दरबार में दस्तक लगाते हुए भी नजर आ रहे हैं। वायरल सूची को लेकर जबलपुर कांग्रेस ने भी कटाक्ष करना नही छोड़ा। कांग्रेस नेता अभिषेक मिश्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट में वायरल सूची को भाजपा के लंगड़े घोड़े का दर्जा दिया और लिखा कि महिलाओं के नाम पर पूरे देश में हल्ला करने वाले बताएं कि निगम मंडलों की नियुक्तियों में कितनी महिलाओं को रखा गया है..? लंगड़े घोड़े पर सियासत फिर शहर में शुरू हुई जिसकी चर्चाएं भोपाल तक जोरों पर हुईं। इधर भाजपा के स्थानीय नेताओं ने अभी खुलकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है मगर कयास लगाए जा रहे हैं कि निगम मंडलों की सूची में अब कांग्रेस के विरोध, बयानबाजी, कटाक्ष के बाद महिलाओं के नाम पर भी आलाकमान द्वारा विचार किया जा रहा है इसलिए सूची अभी होल्ड कर दी गई है। सूत्रों की मानें तो निगम मंडलों की किस नेता की क्या जवाबदारी है वो सब निश्चित हो चुका है। इंतजार है तो बस उसे सार्वजनिक करने का। हाल ही में जो सूची वायरल हुई है उसमें अनुसूचित जाति आयोग- कैलाश जाटव, अनुसूचित जनजाति आयोग- भगत सिंह नेताम, युवा आयोग – प्रवीण शर्मा, लघु उद्योग निगम- विनोद गोंटिया, मप्र वेयर हाउसिंग- संजय नगाइच, कटनी विकास प्राधिकरण- शशांक श्रीवास्तव, ओरछा विकास प्राधिकरण अखिलेश अयाची, वित्त विकास निगम- दीपक सक्सेना के नाम शामिल है, वहीं जबलपुर से पूर्व मंत्री अंचल सोनकर, विधायक अभिलाष पांडे, अजय विश्रोई के नामों की चर्चाएं हैं। चर्चाओं के अनुसार जेडीए अध्यक्ष के रूप में भाजपा के संदीप जैन के नाम पर मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है।
बैक डोर एंट्री कहीं बिगाड़ न दावेदारों का खेल…
भारतीय जनता युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष पद पर चयन के लिए कई कयास और गुणा भाग अपने-अपने स्तर पर लगाए जाने लगे हैं। चर्चाएं जोरों पर हैं कि युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष पद की दौड़ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से भी कोई नाम अचानक से बैक डोर एंट्री कर सकता है। सूत्रों की मानें तो ये भले ही यह बैक डोर एंट्री होगी लेकिन अगर यह एंट्री दावेदारों की दौड़ में होती है तो बड़ी प्रभावी होगी और इसे वर्तमान दावेदारों का पूरा गणित बिगड़ जाएगा। फिलहाल जबलपुर से युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष पद के लिए ईशान नायक, रविंद्र तिवारी, रौनक अग्रवाल के नाम चर्चाओं में हैं। इसके अलावा शुभम गोंटिया, मानव घनघोरिया के नाम प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल कराने के लिए प्रयास हो रहे हैं। हालिया बात करें तो युवा मोर्चा के अध्यक्ष को लेकर भारतीय जनता पार्टी में अब गुटबाजी और खेमेबाजी चरम पर नजर भी आने लगी है। भले ही पार्टी का शीर्ष नेतृत्व गुटबाजी को नकार दे लेकिन हकीकत में जो नजर आ रहा है उसको नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। विदित हो कि युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष पद महत्वपूर्ण हैं जिसके नाम को फाइनल करने से पहले
भाजपा को शहर के सभी प्रमुख जनप्रतिनिधियों, सांसद, विधायकों संगठन के महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की रायशुमारी और रज़ामंदी लेनी होगी। इसके बाद ही अंतिम नाम पर मुहर लगाकर उसका नाम सार्वजनिक किया जाएगा। खबर तो ये भी है कि युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष के दावेदार आए दिन भोपाल में डेरा जमाने लगे हैं और अपने अपने भाजपाई दिग्गज नेताओं के दरबार में दस्तक दे रहे हैं, मंशा है कि किसी तरह सेटिंग फिक्स हो जाए और नगर अध्यक्ष का पद उन्हें मिल जाए।हालांकि सवाल बरकरार है कि संगठन द्वारा किसे प्राथमिकता देकर नगर अध्यक्ष बनाया जाता है। राजनैतिक जानकारों की मानें तो इसमें अभी करीब 1 माह का समय लग सकता है।
