अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। इजरायल हमले के लिए तैयार है, वहीं ट्रंप ने होर्मुज में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। भारत ने जारी की एडवाइजरी।
अमेरिका और ईरान (Iran) के बीच बढ़ते तनाव ने हालात को फिर बेहद संवेदनशील बना दिया है। ईरान ने अपने रक्षा तंत्र को सक्रिय कर दिया है, और राजधानी तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम के सक्रिय होने की खबरें हैं, जहां संदिग्ध लक्ष्यों को इंटरसेप्ट करने की कोशिशें सुनी गईं। इसी बीच इजरायल ने दोहराया है कि वो अमेरिका के इशारा मिलते ही ईरान पर दोबारा हमले शुरु कर देगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। नाकेबंदी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निर्देश दिया है कि माइन्स बिछाने वाली किसी भी छोटी नाव को तुरंत नष्ट कर दिया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समय इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है।
अमेरिका की मंजूरी मिलते ही होंगे हमले
वहीं, इजरायल कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान (Iran) को चेतावनी दी है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि उनकी सेना किसी भी संभावित कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है और लक्ष्यों की पहचान कर ली गई है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान पर कार्रवाई के लिए अमेरिका की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
वहीं, ईरान (Iran) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए नई शर्त रखते हुए कहा है कि उसकी लगभग 11 ट्रिलियन डॉलर की जब्त संपत्ति जारी किए बिना जलमार्ग नहीं खोला जाएगा।
ट्रंप के भारत विरोधी बयान से बवाल
इसी बीच, एक अलग विवाद में डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया रीपोस्ट पर भी सफाई देनी पड़ी, जिसमें रेडियो होस्ट माइकल सैवेज की विवादित टिप्पणियां शामिल थीं। अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया कि ट्रंप भारत को “महान देश” मानते हैं और उसके नेतृत्व को अपना अच्छा मित्र बताते हैं।
इस तनावपूर्ण माहौल में भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर उन्हें ईरान छोड़ने की सलाह दी है। इससे पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) द्वारा दुबई से गुजरात जा रहे एक जहाज को जब्त किए जाने की घटना ने चिंता और बढ़ा दी थी।
होर्मुज में तनाव से पश्चिम एशिया में संकट
इस मुद्दे पर रणधीर जायसवाल ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने खबरें देखी हैं, लेकिन इस पर आगे कोई टिप्पणी नहीं की। कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव, सैन्य तैयारियां और कूटनीतिक गतिरोध पूरे पश्चिम एशिया को एक बड़े संकट की ओर ले जाते दिख रहे हैं।
