
सलामतपुर। रायसेन जिले के छोटे से गांव सेमरी के रहने वाली अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही अंजना यादव ने 21 अप्रैल को सुबह 8:15 बजे 6,119 मीटर ऊँची लाबुचे पीक को सफलतापूर्वक फतह कर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज की।
भारत से 3 अप्रैल 2026 को काठमांडू के लिए रवाना होकर उन्होंने इस दो माह के अभियान की शुरुआत की। काठमांडू से लुकला और नामचे बाजार होते हुए शुरू हुए इस अभियान में उन्होंने कठिन परिस्थितियों भीषण ठंड, बर्फबारी और तेज हवाओं का साहसपूर्वक सामना किया। अंतिम चढ़ाई के दौरान रात लगभग 1 बजे समिट पुश शुरू कर उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प से शिखर तक पहुँचकर सफलता हासिल की। इस अभियान में 8K कंपनी का विशेष सहयोग रहा और उनके गाइड अत्यंत अनुभवी रहे, जिन्होंने हर कदम पर अंजना का मार्गदर्शन किया और मुश्किल हालात में उन्हें लगातार प्रेरित किया। अंजना ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी टीम, गाइड और सहयोगी संस्था को देते हुए सभी का हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया। अंजना ने अपने पति तथा अपने माता-पिता के निरंतर सहयोग और विश्वास के लिए भी आभार जताया, जिनके समर्थन से वह इस मुकाम तक पहुँच पाईं। अब अंजना यादव का अगला लक्ष्य विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करना है, जहाँ वह भारत का तिरंगा शान से लहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इन प्रमुख ऊंची चोटियों पर चढ़ चुकी हैं अंजना–
अंजना यादव कई ऊंची चोटियों पर देश का तिरंगा फहरा चुकी हैं। जिनमें माउंट फ्रेंडशिप पीक 17346 फिट, माउंट यू नाम पीक 20000 फिट, माउंट रेनोक पीक 16023 फिट, माउंट कालापट्टर पीक 18192 फिट, माउंट गोकू पीक 17929 फिट, माउंट पतासु पीक 13800 फिट के साथ ही 19 किलो मीटर गंगा राफ्टिंग ऋषिकेश , ऑल ओवर गेम्स में 17 नेशनल खेल चुकी हैं। कबड्डी खो-खो, ताइक्वांडो, विसवाल आदि में भी खेल चुकी हैं। अंजना यादव ने माउंटट्रेनिंग बेसिक बीएमसी कोर्स हिमालयन इंस्टीट्यूट से किया है जिसके भारत में तीन ही संस्थान है। और दुनिया का सबसे ऊंचा महाद्वीप माउंट एवरेस्ट है उसका वेस कैंप पर भी तिरंगा फहराया है। वह अभी हिंदुस्तान एडवेंचर फाउंडेशन कंपनी के साथ जा रही हैं। और इसके अलावा भी वह रक्तदान, जलसेवा, पर्यावरण आदि में रुचि रखकर विभिन्न कार्य करती रहती हैं।
इनका कहना है
अब मेरा लक्ष्य विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करना है, जहाँ वह भारत का तिरंगा शान से लहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।इस अभियान के लिए पिछले सात महीनों से लगातार कड़ी मेहनत और प्रशिक्षण कर रही हूं।
अंजना यादव, अंतराष्ट्रीय पर्वतारोही।
