
जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक कुमार सिंह तथा जस्टिस अजय कुमार निरंकारी पीथमपुर में रामकी व री सस्टेनेबिलिटी वेस्ट मैनेजमेंट फैसिलिटी में दबाई गयी यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से निकली 900 मीट्रिक टन राख की टॉक्सिसिटी के संबंध में असेसमेंट रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी परिसर को सुरक्षित कर भोपाल गैस मेमोरियल बनाये जाने के संबंध में कार्य योजना पेश करने के निर्देश भी जारी किये है।
गौरतलब है कि साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रही है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से पेश रिपोर्ट में बताया गया था कि पूर्व में पारित आदेश के अनुसार यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है। जहरीले कचरे से लगभग 900 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित हुआ है।
इस दौरान हाईकोर्ट में दायर की गयी अन्य याचिका में कहा गया था कि कि जहरीले कचरे से निकली रखा और अवशेष में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है। राख में मरकरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जापान व जर्मनी के पास है। आबादी वाले क्षेत्र से पांच सौ मीटर दूर पर उनकी लैंड फिलिंग की जा रही है। हाईकोर्ट ने उक्त याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किये जाने के आदेश जारी किये गये थे।
याचिका की सुनवाई करते हुए युगल पीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में सरकार के द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया जाने पर रोक लगा दी थी। सरकार के आवेदन पर हाईकोर्ट ने उक्त आदेश वापस ले लिया था। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि जहरीले कचरे से निकाली राख की लैंड फिलिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेष की गयी रिपोर्ट में कहा गया था कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी परिसर को सुरक्षित कर भोपाल गैस मेमोरियल का निर्माण करवाया जायेगा। इस संबंध में हुई बैठक में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन रूल्स 2025 के तहत शॉर्ट-टेंडर जारी करने का निर्णय लिया गया है।
परिसर की सफाई, टॉक्सिक वेस्ट को हटाने एव आस-पास की खराब मिट्टी और ग्राउंड वाटर के सुधार, खराब प्लांट स्ट्रक्चर के डिटॉक्सिफिकेशन और डीकंटैमिनेशन के संबंध में बैठक की चर्चा की गयी गयी थी।
इस दौरान बीजीपीएसएसएस की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने दबाई गयी ज़हरीली राख के पूरे असेसमेंट के लिए हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन पेष करने निर्देश जारी किये थे। जिसके बाद बीजीपीएसएसएस की तरफ से हाईकोर्ट में इंटर विनर बनने आवेदन पेश किया था। युगल पीठ ने सुनवाई के बाद आवेदन को स्वीकार करते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिका पर अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गयी है।
