यातायात में बाधक अवैध धार्मिक स्थलों की सूची प्रस्तुत करेंः हाईकोर्ट

इंदौर: सोमवार को हाईकोर्ट में यातायात व्यवस्था को लेकर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अपने-अपने तर्क और सवाल किए. खास बात यह रही कि हाईकोर्ट ने यातायात में बाधक अवैध धार्मिक स्थलों की सूची प्रशासन को प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं.शहर के यातयात को लेकर आज जस्टिस विनय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की बेंच में सुनवाई थी. सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी उपस्थित हुए.

नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने डबल बेंच को बताया कि बीआरटीएस पूरा तोड़ दिया है और सभी 17 बाद स्टॉप हटा दिए गए हैं. इसके बाद यातायात अव्यवस्था को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कोर्ट को अवगत कराया कि रोबोट चौराहे से रेडिसन चौराहे तक दिनभर यातायात जाम रहता है. वहां के सर्विस रोड ठीक नहीं है. इसी तरह शहर के अनेक मुख्य मार्गो और सर्विस रोड खुदे होने से यातायात जाम लगा रहता है.

बागड़िया ने कोर्ट को बताया कि पीक समय में शहर में भी लोग यातायात जाम से परेशान हैं. दो पहिया वाहन चालकों पर नियंत्रण नहीं है, वे सिंगल तोड़कर इधर-उधर से कहीं भी घुस जाते है, जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है. जस्टिस शुक्ला और अवस्थी ने डीसीपी यातायात को हाई कोर्ट के यातायात प्रबंधन समिति के साथ समन्वय करके समस्त का स्थाई समाधान करने के निर्देश दिए. इसके बाद हाईकोर्ट ने शहर के मुख्य सड़कों और अन्य सड़कों पर यातायात में बाधक अवैध धार्मिक स्थलों की सूची अगली सुनवाई पर प्रस्तुत करने के आदेश दिए. उक्त मामले में अगली सुनवाई 7 मई को होगी.

यातायात में स्टॉफ के कमी- झेलावत
वरिष्ठ अधिवक्ता विनय झेलावत ने सुनवाई के दौरान बताया कि इंदौर में स्वीकृत यातायात कर्मचारियों की संख्या के अनुपात में 237 यातायात कर्मी कम है. हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह और संबंधित विभाग यातायात बल की पूर्ति करे.

चौराहे पर कोने में खड़े होकर सिपाही चालान बनाते रहते हैंः बागड़िया
यातायात व्यवस्था को लेकर जारी हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आज वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने सवाल उठाया कि हाईकोर्ट के पुराने निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है. चौराहों पर तैनात यातायात पुलिस कर्मी मौजूद नहीं रहते हैं. यदि रहते है तो कोने में खड़े होकर चालान बनाते हुए देखा जा सकता है. शहर में 24 सिग्नल चालू नहीं है अभी भी. बागडिया ने सुनवाई के दौरान डीसीपी को कोर्ट में कहा कि मेरे साथ कार में बैठकर चलिए , पुलिस कर्मी नजर आते है या नहीं. इस बार दोनों न्यायाधीश ने कहा कि सड़कों और चौराहों पर यातायात पुलिस के जवान नहीं दिखते हैं.

वीवीआईपी और वीआईपी सुरक्षा के पूछे नियम
हाईकोर्ट में यातायात व्यवस्था को लेकर सुनवाई में जस्टिस विनय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी ने डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी से पूछा कि वीवीआईपी और वीआईपी के लिए यातायात के क्या नियम है. डीसीपी ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है. सुरक्षा की दृष्टि से यातायात रोका जाता है, सिर्फ 1 मिनट के लिए. उक्त बात पर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने सवाल उठाया कि वीवीआईपी और वीआईपी निकलने के बाद यातायात पुलिस और जवान गायब हो जाते है और चौराहे लावारिस छोड़ दिए जाते हैं। इसके बाद यातायात जाम हो जाता है

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