बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका: बेरोजगार है और उम्र भी कम, पिता की गुहार पर हाईकोर्ट ने बेटी और परिजनों को बातचीत के लिए भेजा

जबलपुर। उम्र में छोटे नवयुवक के द्वारा बेटी को भगाकर ले जाने का आरोप लगाते हुए पिता की तरफ से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि विशेष समुदाय के युवक ने उसकी बेटी का ब्रेन वॉश कर दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगल पीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए बेटी तथा परिजनों के बीच कानूनी मध्यस्थता के निर्देश जारी किये है।

सिंगरौली निवासी सरकारी कर्मचारी की तरफ से दायर की गयी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि उसकी 19 वर्षीय बेटी कॉलेज में पढ़ाई करती थी और फुटबॉल खिलाडी थी। कॉलेज में पढने वाले उससे एक साल छोटा नवयुवक उसे भगाकर ले गया है। उसकी बेटी विगत 13 अप्रैल से गायब है उसके लापता होने की रिपोर्ट संबंधित थाने में दर्ज कराई गई थी।

याचिका में कहा गया था कि युवक ने उसकी बेटी का ब्रेन वॉश कर दिया है, जिसके कारण उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह परिजनों से बात भी नही करना चाहती है। बेटी का भगाकर ले जाने वाला युवक महज 18 साल का है और आर्थिक रूप से असक्षम है। बेरोजगार होने के कारण वह उसकी बेटी का पालन नहीं कर सकता है। उसका परिवार भी आर्थिक रूप से कमजोर है। कानून तौर भी युवक 21 साल से पहले विवाह नहीं कर सकता है। याचिका में राहत चाही गयी थी कि बेटी को भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे परिजनों के सुपुर्द किया जाये। याचिका की सुनवाई करते हुए युगल पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि लडकी तथा परिजनों के बीच कानूनी मध्यस्थता के निर्देश जारी किये है।

 

 

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