वॉशिंगटन, 18 अप्रैल (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के साथ बातचीत से बुधवार तक कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो वह दोनों देशों के बीच जारी अस्थायी संघर्ष-विराम को आगे नहीं बढ़ा सकता। श्री ट्रंप के इस बयान ने फिर से सैन्य कार्रवाई की आशंका को जन्म दे दिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और ईरानी प्रतिनिधिमंडल सोमवार को शांति वार्ता के दूसरे दौर की बैठक में शामिल होने वाले हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की है। श्री ट्रंप ने यह भी भरोसा जताया कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचने के करीब हैं। इस बीच लेबनान में अलग से चल रहे 10 दिवसीय संघर्ष-विराम के पहले 24 घंटे काफी हद तक प्रभावी रहे। हालांकि इस दौरान लेबनान ने इजराइल पर कई बार संघर्ष-विराम तोड़ने का आरोप लगाया ।
अन्य घटनाक्रमों में अमेरिकी राजकोषीय विभाग ने एक और छूट जारी की, जिससे प्रतिबंधित समुद्री रास्ते से आने वाले रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति मिल गई। यह छूट विशेष रूप से 17 अप्रैल से 16 मई के बीच जहाजों पर लादे गए माल पर लागू होती है। वित्तीय बाजारों पर इसका तेजी से असर देखा गया क्योंकि ईरानी विदेश मंत्री की इस घोषणा के बाद तेल की कीमतें गिर गईं कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। वहीं एस और पी 500 लगातार तीसरी बार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और नैस्डैक कंपोजिट ने 1992 के बाद से अपनी सबसे लंबी जीत दर्ज की। श्री ट्रंप ने कूटनीतिक मोर्चे पर कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से ‘बहुत खुश’ हैं और उन्होंने मई में होने वाली अपनी बातचीत से पहले उम्मीद जाहिर की।
आने वाले दिन अमेरिका-ईरान बातचीत के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं क्योंकि संघर्ष-विराम के खत्म होने की संभावना और व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता दांव पर लगी हुई है। इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखता है, तो वह रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर देगा। संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने शनिवार को यह बात कही। उधर लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा कि उनका देश ‘स्थायी समझौतों’ के एक ‘नए चरण’ के कगार पर है और अब किसी के भी युद्धों के लिए ‘अखाड़ा’ नहीं है। यह बयान इजराइल-हिज्बुल्लाह युद्ध में संघर्ष-विराम लागू होने के बाद आया।

