तिरुवनंतपुरम | केरल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने से पहले ही कांग्रेस खेमे में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतर्कलह चरम पर पहुँच गई है। विवाद की शुरुआत वरिष्ठ नेता के. सुधाकरन के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने विपक्षी नेता वीडी सतीशन को दरकिनार कर केसी वेणुगोपाल के नाम की जोरदार पैरवी की है। राजनीतिक गलियारों में इसे सतीशन के खिलाफ एक सोची-समझी चाल माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि सुधाकरन ने मुख्यमंत्री पद पर चर्चा न करने के हाईकमान के सख्त निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। इस गुटबाजी ने पार्टी के भीतर उस समय तनाव बढ़ा दिया है जब कार्यकर्ता चुनावी नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
इस विवाद के बीच केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने इस बहस को ‘गैर-जरूरी’ और ‘असामयिक’ बताया है। जोसेफ ने चेतावनी दी है कि कुछ विशेष समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर चुनिंदा नेताओं के पक्ष में फर्जी अकाउंट्स के जरिए अभियान चलाया जा रहा है, जो पार्टी अनुशासन का खुला उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की परंपरा के अनुसार, चुनाव जीतने के बाद हाईकमान के प्रतिनिधि विधायकों की राय लेंगे और उसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। चेन्निथला ने भी कार्यकर्ताओं को सचेत किया है कि इस तरह की बयानबाजी से चुनावी मेहनत पर पानी फिर सकता है और मनोबल गिर सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस गुटबाजी की जड़ें सुधाकरन और सतीशन के बीच पुराने खराब रिश्तों में छिपी हैं। आरोप है कि सतीशन ने ही हाईकमान से सांसदों के विधानसभा चुनाव लड़ने पर रोक लगवाई थी, ताकि सुधाकरन को राज्य की राजनीति से दूर रखा जा सके। हाल ही में सुधाकरन ने फेसबुक पर वेणुगोपाल की जमकर तारीफ की और उन्हें करुणाकरन व ओमन चांडी जैसे दिग्गजों का उत्तराधिकारी बताया, जिसे सतीशन पर सीधा हमला माना जा रहा है। फिलहाल, केसी वेणुगोपाल ने इन अटकलों को खारिज करते हुए धैर्य रखने की अपील की है, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

