इंदौर:ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध का वैश्विक स्तर पर गहरा एवं नकारात्मक असर पडा है. जिसमें तेल आपूर्ति बाधित होने से ईधन की कीमतें बढ़ी है. प्राकृतिक गैस की कमी का असर उत्पादन पर प्रतिकुल रहा जो हमारे देश, प्रदेश एवं स्थानीय उद्योग एवं व्यापार की गतिविधियों सहित आयात निर्यात पर भी देखने को मिला है विशेषकर इस वैश्विक संकट का असर सूक्ष्म, लघु श्रेणी उद्योगों पर अधिकतम हुआ है. ईरान-अमेरिका तनाव ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने का महत्वपूर्ण सबक दिया है.
यह बात स्वदेशी जागरण मंच के अभा. सह संगठन मंत्री सतीश कुमार ने मीडिया से चर्चा में कही. वे एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश एवं स्वदेशी जागरण मंच द्वारा संयुक्त आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में सम्मिलित होने आए थे. संगोष्ठी का आयोजन आज जाल सभागृह में किया गया था. इसमें मुख्य विषय ईरान-अमेरिका युध्द के प्रभाव से भारत को आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और वर्तमान चुनौतिया एवं आर्थिक प्रभाव जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई. इसके पूर्व सतीश कुमार द्वारा मीडिया से चर्चा की गई. इसमें उन्होंने बताया कि वर्तमान परिस्थिति, ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मारत को अपनी ऊर्जा और रक्षा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करनी होगी.
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जरूरी है. इस पर ध्यान देना होगा. दुनिया में निरंतर अस्थिरता बढ़ रही है और संकट व चुनौतियां आती जा रही है ऐसी स्थिति में हमें हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की जरूरत है. आत्मनिर्भरता ही एक ऐसा कवच है, जो हमें संकट व चुनौतियों से बचा सकता है. समय की मांग है कि हमें ऊर्जा के क्षेत्र में वैकल्पिक संसाधनों की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए. सौर और पवन ऊर्जा अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहे हैं बल्कि आर्थिक स्थिरता का आधार भी बन चुके हैं. एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री योगेश मेहता ने कहा कि प्रदेश में गैस आधारित उद्योगों पर 14 प्रतिशत वैट का भार आ रहा है तथा जीएसटी के कारण उद्योगों को वैट का कोई लाभ नहीं मिल रहा है जबकि अन्य पडौसी राज्यों में यही बैट दर 3 प्रतिशत तक की है. अतः प्रदेश के उद्योगों, नव निवेश एवं रोजगार को ध्यान में रखते हुए वैट की दर युक्तिसंगत करने हेतु प्रदेश सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है.
