जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में तकनीकी कर्मचारियों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वित्त विभाग ने इन कर्मचारियों को दिए जा रहे शैक्षणिक संवर्ग के वेतनमान को अवैध घोषित करते हुए अतिरिक्त भुगतान की वसूली के निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले से विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की शुरुआत अप्रैल 2023 में हुई थी, जब वेतनमान निर्धारण में गड़बड़ी पर आपत्ति दर्ज की गई। इसके बाद सेवा अभिलेखों की जांच में पाया गया कि कर्मचारियों को नियमों के विपरीत अधिक वेतन दिया जा रहा था। महालेखाकार की जांच में यह भी सामने आया कि अब तक लगभग 6 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जा चुका है।
कमेटी से मिली थी अलग-अलग रिपोर्ट
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक समिति बनाई गई थी उसे समिति में तीन लोग शामिल थे जिसमें दो लोगों में अलग रिपोर्ट दी थी तो वही एक सदस्य ने अलग रिपोर्ट पेश की थी। वहीं इस दोनों रिपोर्ट के बाद एक पत्रक तैयार हुआ था जिसे फर्जी पत्रक बताया गया था। इस रिपोर्ट के बाद वित्त विभाग से रिकवरी का आदेश जारी हुआ था। सूत्रों ने बताया कि कार्य परिषद की बैठक में भी इस मामले को रखा गया था, इसके बाद एक और फाइनल कमेटी बनाने का तय हुआ है।
शासन को लगातार वित्तीय नुकसान
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय-सीमा में वसूली नहीं होने से शासन को लगातार वित्तीय नुकसान हो रहा है। इससे पहले 26 अप्रैल 2024 को उच्च न्यायालय के निर्देश पर दो कर्मचारियों से वसूली के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन व्यापक स्तर पर कार्रवाई अब तेज की जा रही है।
कर्मचारियों में भारी चिंता का माहौल
इस बीच, प्रभावित कर्मचारियों में भारी चिंता का माहौल है। कई कर्मचारियों ने बढ़े हुए वेतन के आधार पर गृह ऋण लेकर मकान खरीदे हैं या अन्य जरूरी कार्यों में राशि खर्च कर दी है। ऐसे में एकमुश्त बड़ी वसूली उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन सकती है।
इनका कहना है
वित्त विभाग से निर्देश जारी हुए हैं, इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन को पत्र लिखकर वास्तविकता बताते हुए मार्गदर्शन मांगा है। वहीं एक फैक्ट फाइनली कमेटी भी बनाई गई है, इस कमेटी की जांच होने के बाद जो भी तय होगा उसके बाद नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
प्रो. डॉ राजेश कुमार वर्मा, कुलगुरु
