जबलपुर: नशे के सौदागरों के खिलाफ बरती गई लापरवाही, मेहरबानी बरने वाले थाना प्रभारियों समेत पुलिस कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की गाज गिर गई।जबलपुर जोन आईजी प्रमोद वर्मा ने तत्काल प्रभाव से पनागर थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार समेत चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने गांजा तस्करों को पकडऩे के बाद मौके से ही साठगांठ कर छोड़ दिया था। जबकि आधा दर्जन थाना प्रभारियों को नोटिस जारी किए गए है इन्होंनेे भी एनडीपीएस एक्ट के मामलों में लापरवाही बरती है। जानकारी के अनुसार पनागर पुलिस ने गांजा तस्करी के कई मामलों मामले में दबिश दी थी। तस्करों को रंगे हाथों पकडऩे के बावजूद, कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें मौके से ही छोड़ दिया दिया था। इसके बाद अचानक सीधे आईजी द्वारा विभागीय कार्रवाई कर दी गई जिसके बाद पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया है।
कप्तान नहीं, सीधे आईजी तक पहुंची थी शिकायतें
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले की शिकायतें पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय पास न जाकर सीधे आईजी प्रमोद वर्मा के पास पहुंच रही थी। आरोप था कि पनागर पुलिस ने कई गांजा तस्करों को पकड़ा तो था, लेकिन कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें मौके से ही रफा-दफा कर दिया गया। आईजी ने मामले की प्राथमिक जांच कराई, जिसमें आरोपों में सत्यता पाए जाने और एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए सख्त रुख अपनाते हुए टीआई विपिन ताम्रकार और उनके साथ शामिल एएसआई संजय मिश्रा, एसआई रवि परिहार, विनोद पर निलंबन की कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के आदेश दे दिए है।
आधा दर्जन थाना प्रभारियों पर भी गिरी गाज
इस कार्रवाई की गूंज केवल पनागर तक ही सीमित नहीं रही। जबलपुर के लगभग आधा दर्जन अन्य थाना प्रभारियों को भी एनडीपीएस एक्ट के पुराने मामलों में लापरवाही बरतने और जांच में ढिलाई देने के चलते कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग की इस सख्ती से महकमे में हडक़ंप मचा हुआ है।
विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई
आईजी प्रमोद वर्मा ने स्पष्ट किया है कि नशे के अवैध कारोबार में किसी भी प्रकार की संलिप्तता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। टीआई, तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई भी हो होगी । निलंबन के साथ ही इन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इसके बाद कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
