तेहरान | लेबनान में इजराइल के निरंतर सैन्य अभियानों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम समझौते को खतरे में डाल दिया है। ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने इजराइल और अमेरिका पर 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के तीन प्रमुख नियमों के उल्लंघन का सीधा आरोप लगाया है। गालिबफ के अनुसार, लेबनान में बमबारी जारी रखना, ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन की घुसपैठ और ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नकारना सीधे तौर पर विश्वासघात है। इस तनाव के चलते ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इस वीकेंड पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली महत्वपूर्ण सीधी बातचीत का बहिष्कार कर सकता है।
दूसरी ओर, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ हुए अस्थायी समझौते में हिज्बुल्ला या लेबनान शामिल नहीं थे। उन्होंने गर्व से घोषणा की कि इजराइली सेना ने 10 मिनट के भीतर हिज्बुल्ला के 100 ठिकानों को तबाह कर उन्हें सबसे बड़ा झटका दिया है। नेतन्याहू का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि इजराइल के उद्देश्य या तो बातचीत से पूरे होंगे या फिर युद्ध से, और उनकी सेना किसी भी समय पूर्ण युद्ध में लौटने के लिए ‘ट्रिगर’ पर उंगली रखकर तैयार बैठी है।
अमेरिका और ईरान के बीच हफ्तों की गहरी दुश्मनी को खत्म करने के उद्देश्य से इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करने वाले हैं, जबकि ईरानी पक्ष का जिम्मा गालिबफ के कंधों पर है। हालांकि, ईरान के भीतर अमेरिका के प्रति ऐतिहासिक अविश्वास और हालिया हमलों ने वार्ता की मेज पर अनिश्चितता पैदा कर दी है। यदि यह बैठक रद्द होती है, तो पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आग और अधिक फैलने की आशंका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों को गहरा झटका लगेगा।

