नई दिल्ली। 29 दिसंबर, 2025। सीरिया के होम्स शहर में शुक्रवार को एक अलवी मस्जिद में हुए भीषण बम धमाके के बाद अब सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे हैं। रविवार को अल्पसंख्यक अलवी समुदाय के प्रदर्शनकारियों और उनके विरोधियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बता दें कि शुक्रवार को हुए उस मस्जिद धमाके में आठ लोगों की जान गई थी, जिसके विरोध में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। ‘सुप्रीम अलवाइट इस्लामिक काउंसिल’ के आह्वान पर लजीकिया और तरतूस जैसे इलाकों में हुए इन प्रदर्शनों ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त है।
सुरक्षा बलों पर हमला: थाने पर फेंके गए हथगोले और फूंकी गईं गाड़ियां, दंगाइयों को तितर-बितर करने के लिए हुई फायरिंग
प्रदर्शनों के दौरान हालात तब बेकाबू हो गए जब लजीकिया में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। तरतूस क्षेत्र में एक थाने पर हथगोला फेंके जाने की खबर है, जिसमें दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। सरकारी टेलीविजन के अनुसार, सुरक्षा बलों ने बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवा में गोलियां चलाईं। हिंसा के दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर पथराव हुआ, जिसमें सरकारी समर्थक और अलवी प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए। सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद से जारी राजनीतिक अस्थिरता ने इन धार्मिक मतभेदों को और अधिक हवा दी है, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
कट्टरपंथी साजिश: ‘सराया अंसार अल-सुन्ना’ ने ली हमले की जिम्मेदारी, सीरिया में गहराता जा रहा है आंतरिक गृहयुद्ध
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मस्जिद धमाके का मुख्य उद्देश्य अलवी समुदाय को निशाना बनाना था। एक कट्टरपंथी समूह ‘सराया अंसार अल-सुन्ना’ ने इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीरिया में धार्मिक तनाव और आंतरिक संघर्ष की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। इससे पहले जुलाई 2025 में भी सुवेदा शहर में ड्रूज समुदाय और सशस्त्र समूहों के बीच ऐसा ही खूनी संघर्ष देखा गया था। देश में कानून व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के चलते सीरिया अब एक बार फिर भीषण गृहयुद्ध की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

