छतरपुर: केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत बनने वाले ढोड़न बांध के डूब क्षेत्र और प्रभावित गांवों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े तेवर अपना लिए हैं। जिला मजिस्ट्रेट पार्थ जैसवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं। प्रशासन को अंदेशा है कि कुछ असामाजिक तत्व निर्माण कार्य में बाधा डाल सकते हैं या लोकशांति को खतरा पैदा कर सकते हैं।
इन गांवों में रहेगा ‘सख्त पहरा’
प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, तहसील सटई के ग्राम ढोड़न, खरयानी, पलकौहा, सुकवाहा, भोरखुवा, घुघरी और तहसील बिजावर के ग्राम कुपी, शहपुरा, बसुधा, नैगुवां, ककरा, पाठापुर, डुगरिया, कदवारा सहित इन गांवों की सीमाओं पर पाबंदियां लागू रहेंगी। इन क्षेत्रों में 5 या 5 से अधिक व्यक्तियों के अनावश्यक रूप से एकत्रित होने पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है।
बाहरी व्यक्तियों के लिए ‘नो एंट्री’
आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बाहरी लोगों से जुड़ा है। जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया है कि जो लोग इन गांवों के मूल निवासी नहीं हैं और दूसरे जिलों से आकर यहाँ रह रहे हैं, वे तत्काल जिले की सीमा छोड़ दें। यदि कोई विशेष कारण से रुका है, तो उसे संबंधित थाने में सूचना देकर पुलिस सत्यापन (Verification) कराना होगा। बांध स्थल पर केवल अधिकृत अधिकारी और कर्मचारी ही प्रवेश कर सकेंगे।
बिना अनुमति सभा और प्रदर्शन पर प्रतिबंध
अगले 2 महीनों तक प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की आमसभा, जुलूस या प्रदर्शन के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM) की लिखित अनुमति अनिवार्य होगी। बिना अनुमति भीड़ जुटाने पर इसे लोकशांति के लिए खतरा माना जाएगा। यह आदेश 6 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है।
उल्लंघन किया तो होगी जेल
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में प्रभावित व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय में आवेदन देकर शर्तों में छूट की मांग कर सकेंगे
