जबलपुर: स्वयं खर्च कर उपभोक्ताओं के घरों के छतों पर स्थापित सोलकर संयंत्र से बनी बिजली और उसके खपत पर फिक्स चार्ज लगाया जा रहा है। यह फिक्स चार्ज गलत है। नियामक आयोग ने इस आपत्ति को खारिज कर इस फिक्स चार्ज को सही माना है। मतलब ये साफ है कि अब सोलर वाले उपभोक्ताओं को चपत लगने वाली है।26 मार्च को जारी टैरिफ आदेश के पृष्ठ 190 इश्यू कमांक 23 में आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं द्वारा सोलर संयंत्र लगाने के बाद निर्मित बिजली हेतु बिजली कंपनियों के वितरण नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा है। इस नेटवर्क के लागत की वसूली हेतु यह फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है, जो विद्युत अधिनियम 2003 के तहत् है।
फिक्स चार्ज भी है बहुत ज्यादा विदित हो कि सोलर लगाने वाले उपभोक्ताओं के बिलों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि लगाया जा रहा फिक्स चार्ज भारी भरकम है, वह सालाना 7 से 9 हजार मतलब प्रतिमाह लगभग 600 रू. है। अत: राज्य सरकार इसमें राहत प्रदान करे। यह मांग जनसंगठनों ने ऊर्जा मंत्री को पत्र भेजकर की है। जानकारी के अनुसार राहत प्रदान करने को लेकर एक जनसंगठनों की बैठक आयोजित की गई जिसमें डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, टी. के. रायघटक, डी.के. सिंग, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, सुभाष चंद्रा, संतोष श्रीवास्तव. डी.आर. लखरे, पी.एस. राजपूत शामिल थे।
