चंद्रभागा मार्ग के नवनिर्माण ने लापरवाह सिस्टम की कलई खोली

इंदौर:शहर के चंद्रभागा मार्ग का नवनिर्माण युद्ध स्तर पर होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन खुदाई के दौरान सामने आई हकीकत ने सिस्टम की लापरवाही उजागर कर दी है. जमीनी हकीकत के अनुसार, खुदाई में न केवल पुरानी पाइपलाइनों व तारों का जाल अस्त-व्यस्त मिला है, बल्कि नियोजन व सुरक्षा के अभाव के कारण स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जो काम की गुणवत्ता व गति पर सवाल उठाता है.खुदाई के दौरान अंडरग्राउंड यूटिलिटीज (बिजली, पानी, सीवर लाइनें) की मैपिंग न होने से काम बार-बार बाधित हो रहा है. निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का सही पालन न होने से राहगीरों व निवासियों को आवागमन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. जल्दबाजी में की जा रही खुदाई व निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा जा रहा है, क्योंकि कार्य की गति के मुकाबले प्रबंधन कमजोर नजर आ रहा है. प्रशासन को इस लापरवाही को सुधारने और व्यवस्थित तरीके से कार्य पूर्ण करने की आवश्यकता है.
जूनी इंदौर का यह मार्ग हर बारिश में तालाब बनता रहा. चंद्रभागा पुल तक हालात ऐसे कि चार पहिया वाहन तक डूब जाते हैं. नवभारत ने समय-समय पर इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाया, साथ ही इसके कारणों को भी उजागर किया. लेकिन, जिम्मेदार लापरवाह बनो रहे. खबरों के जरिये पहले ही बताया जा चुका था कि यहां महाराजा कालीन गहरा नाला मौजूद है, जिसकी सफाई नहीं होने से पानी की निकासी बाधित होती है. अब खुदाई में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नाले के भीतर करीब 5 फीट चौड़े पाइप लगे थे, जो पर्याप्त निकासी कर सकते थे, फिर भी सालों तक जलभराव होता रहा. गाद नहीं हटाना, सीवरेज लाइन की सफाई नहीं करना क्या यह सिर्फ लापरवाही है या जानबूझकर अनदेखी? आखिर कब तक जनता डूबती सड़कों और खोखले दावों का खामियाजा भुगतती रहेगी?

यह बोले रहवासी…

नियमित नाला सफाई सीवरेज मॉनिटरिंग और जवाबदेह सिस्टम ही समाधान है. काम शुरू होने से पहले जमीनी जांच हो, ताकि समस्या जड़ से खत्म हो न कि हर साल वही हालात दोहराए जाएं.
– सैय्यद अशरफ अली

सड़क बार-बार बनाना विकास नहीं संसाधनों की बर्बादी है. जब मूल समस्या पहले ही हल हो सकती थी तो करोड़ों खर्च क्यों किए जा रहे? जनता का पैसा सही मायनों में विकास में लगना चाहिए.
– अंकित मगरे

वर्षों तक चेतावनी के बावजूद आंखें मूंदे रखना सिर्फ लापरवाही नहीं जिम्मेदारी से भागना है. समय पर सफाई होती तो हालात न बिगड़ते, आखिर सिस्टम कब जागेगा और जवाबदेही कब तय होगी?
– मुकेश कुमार वर्मा

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