सारनी: क्षेत्र की वेकोलि पाथाखेड़ा क्षेत्र में राजभाषा हिन्दी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सख्ती तेज कर दी गई है। 31 मार्च 2026 को आयोजित ‘क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति’ की त्रैमासिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
बैठक निदेशक (मानव संसाधन) हेमंत शरद पांडे के मार्गदर्शन एवं क्षेत्रीय महाप्रबंधक संजय एम. मिश्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें महाप्रबंधक (संचालन) जितेन्द्र कुमार गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान पिछले तिमाही एवं फरवरी 2026 में किए गए हिन्दी क्रियान्वयन कार्यों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
समीक्षा में सामने आया कि क्षेत्र में हिन्दी पत्राचार और राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) का शत-प्रतिशत पालन किया जा रहा है। इस पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रबंधन ने इसे भविष्य में भी निरंतर बनाए रखने पर जोर दिया।
बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी विभागीय नाम पट्ट, रबर स्टैम्प एवं अन्य सामग्री द्विभाषी रूप में तैयार की जाए, जिसमें हिन्दी को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, बाहरी संस्थानों को भेजे जाने वाले पत्र यूनिकोड सपोर्टेड हिन्दी फॉन्ट में ही तैयार किए जाएं, ताकि तकनीकी बाधाएं न आएं।
अधिकारियों को यह भी बताया गया कि पाथाखेड़ा क्षेत्र ‘क’ श्रेणी में आता है, जहां हिन्दी के उपयोग का लक्ष्य 100 प्रतिशत निर्धारित है। इस लक्ष्य की नियमित समीक्षा कंपनी स्तर पर की जाती है।
बैठक में प्रशासनिक कार्यों में हिन्दी को प्राथमिकता देने और इसे जनसंचार की सशक्त भाषा बनाने पर जोर देते हुए सभी विभागों से जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने का आह्वान किया गया। इस सख्ती से क्षेत्र में राजभाषा हिन्दी के उपयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
