तेहरान, 24 मार्च (वार्ता) ईरान के सरकारी और अर्द्ध-सरकारी मीडिया ने अमेरिका के खिलाफ कड़ी चेतावनियां जारी रखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “रचनात्मक बातचीत” के दावों को खारिज कर दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी मीडिया ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी प्रकार की बातचीत नहीं हुई है और दोनों देशों के बीच अधिकांश कूटनीतिक संपर्क टूटे हुए हैं।
आईआरजीसी से जुड़ी फार्स समाचार एजेंसी ने भी दोनों देशों के बीच संपर्क से इनकार किया, जो श्री ट्रंप के चल रही वार्ताओं के दावे के विपरीत है।
इस बीच, दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गयी है और लगभग रोजाना एक-दूसरे को धमकियां दी जा रही हैं। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने भी चेतावनी का स्तर बढ़ाते हुए कड़े बयान दिए हैं।
खातम अल-अंबिया मुख्यालय के मेजर जनरल अब्दोल्लाही ने सरकारी टीवी पर कहा, “हम आपको इतनी जोर से मारेंगे कि आपके दांत बाहर आ जाएंगे,” और यह भी संकेत दिया कि संघर्ष बढ़ने पर ईरान “नए गुप्त हथियार” का इस्तेमाल कर सकता है।
ईरानी अधिकारियों ने दोहराया कि उसके बिजली उत्पादन ढांचे पर किसी भी हमले को सहन नहीं किया जाएगा और इसका समान स्तर पर जवाब दिया जाएगा। आईआरजीसी के एक बयान में कहा गया, “हम किसी भी हमले का तुरंत और उसी स्तर पर जवाब देंगे।”
फारसी भाषा के अखबार ‘एन्तेखाब’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यदि ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया गया तो पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगी देशों की सुविधाएं भी हमलों के दायरे में आ सकती हैं।
ईरान की रणनीति अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि ऊर्जा और महत्वपूर्ण अवसंरचना को भी जवाबी कार्रवाई के दायरे में लाने के संकेत दिए गए हैं।
ईरान के ऊर्जा अनुकूलन उपराष्ट्रपति इस्माइल सघाब एस्फहानी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ रहा है और यह अमेरिका पर दबाव बना रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि हमले इजरायल और अमेरिका समर्थित देशों के ढांचों तक फैल सकते हैं।
सुरक्षा परिषद के करीबी ‘नूर न्यूज’ ने अमेरिकी धमकियों को “युद्ध अपराध की खुली स्वीकारोक्ति” और “हताशा का संकेत” बताया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत वहन करता है और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विश्लेषकों का मानना है कि आईआरजीसी की आक्रामक बयानबाजी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है, जिससे पश्चिम एशिया समेत वैश्विक सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका है।
