गुना। अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए चर्चित गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर बिना नाम लिए कड़ा प्रहार किया है। शनिवार को गुना में पत्रकारों से दौरान विधायक ने ‘इलेक्टेड’ यानी जनप्रतिनिधि और ‘सिलेक्टेड’ यानी प्रशासनिक अधिकारियों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रशासनिक अधिकारी जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों पर हावी होने का प्रयास कर रहे हैं।
विधायक शाक्य ने एक आध्यात्मिक लहजे में तंज कसते हुए कहा, हम मंदिर में खड़े हैं और हमें ही प्रसाद नहीं मिल रहा है, यह कैसी व्यवस्था है? मरघट से जगाकर लाए गए लोगों को भोजन कराया जा रहा है, लेकिन हकदारों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने कड़े स्वर में सवाल उठाया कि आखिर ऐसे लोगों को किसका संरक्षण प्राप्त है? उन्होंने इशारों-इशारों में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इलेक्टेड व्यवस्था के अधीन ही सिलेक्टेड लोग होने चाहिए, लेकिन आज स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
विधायक ने जिले में चल रहे विभिन्न उपक्रमों और विकास कार्यों की सार्थकता पर भी संदेह जताया। उन्होंने पूछा कि गुना और उसके आसपास जो भी सरकारी उपक्रम चल रहे हैं, क्या वे वास्तव में जनहित में हैं या उनसे कोई वास्तविक विकास हो रहा है? सबसे ज्यादा नाराजगी उन्होंने गुना में बन रहे मेडिकल कॉलेज को लेकर जाहिर की। विधायक ने कहा, जिले के इतने बड़े प्रोजेक्ट के बारे में मुझसे पूछा तक नहीं गया।
विधायक ने परिभाषा समझाते हुए कहा कि सिलेक्टेड वे लोग हैं जो परीक्षाओं के माध्यम से चयनित होकर आते हैं, जबकि इलेक्टेड वे हैं जिन्हें जनता अपना कीमती वोट देकर चुनती है। लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोपरि है और चुनी हुई सरकार की व्यवस्था के अधीन ही अधिकारियों को कार्य करना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि गलती दोनों पक्षों से हो सकती है, लेकिन वर्तमान में अधिकारियों का हावी होना चिंताजनक है।
