दो साल में सड़कों से हटेगा गौवंश, आधुनिक गौशालाओं से बदलेगा पशुपालन का स्वरूप

भोपाल। पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा है कि प्रदेश में आवारा गौवंश की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सरकार ठोस कदम उठा रही है। उनका दावा है कि आगामी दो वर्षों में मध्यप्रदेश की सड़कों पर गौवंश नजर नहीं आएंगे।

शनिवार को विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों पर आयोजित पत्रकार वार्ता में पटेल ने बताया कि प्रदेश में 30 नई बड़ी गौशालाओं के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं, जिनमें करीब 4 लाख गौवंश के संरक्षण की व्यवस्था होगी। साथ ही स्वावलंबी गौशाला योजना भी शुरू की जा रही है, जिसके तहत न्यूनतम 5 हजार गौवंश क्षमता वाली अत्याधुनिक गौशालाएं विकसित की जाएंगी। प्रत्येक परियोजना पर 50 से 70 करोड़ रुपये तक का निवेश संभावित है।

उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 18 हजार ग्राम पंचायतों को “क्षीरधारा ग्राम” के रूप में विकसित किया जाएगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जाएगा, वहीं प्रेरणास्पद पशुपालकों को “पशुपालन आचार्य” की उपाधि दी जाएगी।

पटेल ने कहा कि पीपीपी मॉडल पर बनने वाली इन गौशालाओं में देश-विदेश से निवेश आएगा, ऑस्ट्रेलिया से भी निवेश प्रस्तावित है। गौवंश की पहचान और निगरानी के लिए चिप लगाए जाएंगे तथा निवेशकों को 5 हजार गौवंश के लिए अधिकतम 130 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

 

 

 

 

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