बाल निकेतन में नहीं रहना, जाना है माता-पिता के साथ, हाईकोर्ट ने किशोरी को दी अनुमति

जबलपुर: हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की युगलपीठ के समक्ष उपस्थित नाबालिग किशोरी ने कहा है उसे बाल निकेतन में नहीं रहना। वह अपने माता-पिता के साथ जाना चाहती है। युगलपीठ ने किशोरी के बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए उसके माता-पिता के सुपुर्द करने के आदेश जारी किये है।
सिंगरौली जिले के बरगवां थानान्तर्गत निवासी 14 वर्षीय किशोरी घर से लापता हो गयी थी।

किशोरी के परिजनों ने संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस द्वारा किशोरी को तलाश नहीं कर पाने के कारण पीड़ित पिता ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि अनावेदक आशीष साकेत उनकी नाबालिग बेटी को बंधक बनाकर रखे हुए है। पुलिस ने सुनवाई के बाद लापता नाबालिग को पेश करने के आदेश जारी किए थे।

पुलिस ने पिछली सुनवाई के दौरान नाबालिगों को चेन्नई से तलाश कर युगलपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया था। किशोरी ने युगलपीठ को बताया था कि परिवारिक विवाद के कारण वह घर छोड़कर गई थी। वह माता-पिता के साथ नहीं जाना चाहती है और बाल निकेतन में रहने तैयार है। युगलपीठ ने किशोरी को जबलपुर स्थित राजकुमारी बाई बाल निकेतन भेजने के आदेश जारी किये थे।

याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय में उपस्थित किशोरी ने माता-पिता के साथ जाने के लिए सहमति व्यक्त की। युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए किशोरी को माता-पिता के सुर्पुद करने के आदेश जारी किये है।

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