मुस्कुराने, सुरक्षा का एहसास दिलाने वाला ऑपरेशन आस्था हुआ बंद, वृद्धजनों मेंं रोष
जबलपुर: बुजुर्गों में सुरक्षा का भाव जगाने और उनकी आवश्यकताओं पर नजर रखने के साथ उनके सुख-दुख में शामिल होने के लिए शुरू हुआ ऑपरेशन आस्था अभियान बंद हो गया है। इस अभियान का उद्देश्य बुजुर्गों के मुस्कुराने की वजह बनने, बड़ों का आशीष लेने, सम्मान करने के साथ उन्हे सुरक्षा का एहसास दिलाना था।
ये अभियान ऐसे बुजुर्ग जो अकेले रहते है या उनके बच्चे, परिजन कामकाज या पढ़ाई के सिलसिले में दूसरे प्रदेश या विदेश में रह रहे है उन्हें देखते हुए जबलपुर एसपी रहे तुषारकांत विद्यार्थी ने शुरू किया था जिसे उन्होंने डीआईजी जबलपुर रेंज रहते हुए विकसित किया था.
इस अभियान ने बुजुर्गों को नई ऊर्जा के साथ सुरक्षा का एहसास दिलाया। इस अभियान के तहत मोहल्ला, वार्ड स्तर तक में बुजुर्गों की समितियां बनाई गई। ताकि जरूरत पडऩे पर सदैव एक दूसरे के साथ खड़े रहे, और एक दूसरे के सुख दुख में शामिल हो सके। इस अभियान के तहत बुजुर्गों की हर संभव मदद की गई लेकिन श्री तुषारकांत विद्यार्थी का सन् 18 नवम्बर 2024 में ट्रांसफर भोपाल मुख्याल कर दिया गया जिसके बाद ये अभियान बंद हो गया। जिसके चलते अब वृद्धजनों में आक्रोश भी देखा जा रहा है।
इनका भी हुआ था गठन
इस अभियान के तहत वरिष्ठनों की सुरक्षा संवाद, स्वास्थ्य की लाठी बनने के लिए तीन सेल मेडिकल, लीगल, मनोरंजन सेल का भी गठन हुआ था।
साढ़े चार हजार बुजुर्गों का डाटा हुआ था तैयार इस अभियान के तहत करीब साढ़े चार हजार ऐसे बुजुर्गोंं का डाटा तैयार हुआ था जो या तो घरों में अकेले रहते थे या उनके बच्चे शहर से बाहर रहते है। श्री विद्यार्थी खुद सीनियर सिटीजन के घर-घर जा करने सीधे संवाद करने के साथ यदि उन्हें किसी प्रकार की कोई समस्या है तो तत्काल कार्रवाई कर समस्या का समाधान करते थे उनके जन्मदिन और शादी की वर्षगांठ पर शुभाकमनाएं देने भी वे भी खुद पहुंचते थे उनके कार्यालय में सप्ताह में एक बार दरबार भी सजता था जहां बुजुर्गों की सुनवाई होती थी।
बुजुर्ग ही अपराधियों का सॉफ्ट टारगेट
अकेले रहने या सडक़ों पर निकले वाले बुजुर्ग ही अपराधियों का सॉफ्ट टारगेट होते है। अपराधी ऐसे बुजुर्गों की पहले रैकी करते है और अपराध को अंजाम देते है। ऐसे बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए ही आस्था अभियान शुरू किया गया था जिसने सुरक्षा की भावना जगाई थी लेकिन अब ये अभियान बंद हो गया जिसके चलते बुजुर्ग खुद को फिर से असुरक्षित महसूस करने लगे है।
