5वीं और 8वीं के पेपर लीक कैसे हुए

मध्य क्षेत्र की डायरी
दिलीप झा

मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल अपने कारनामे की वजह से सरकार की भारी बदनामी हो रही है। यह शर्मनाक बात है कि 17 जिलों के पेपर एक ही प्रेस छपे और यहीं से 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा के सभी प्रश्न पत्र सेंटर तक पहुंचने से पहले लीक हो गए। मामले को तूल पकड़ता देख आनन फानन में अधिकारियों ने जांच शुरू की और कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को रिपोर्ट सौंप दी है। इसके बाद कलेक्टर ने पूरी घटना की जानकारी साइबर सेल और पुलिस अधिकारियों को दी है। भोपाल की नवीन प्रिंटिंग प्रेस को भोपाल सहित 17 जिलों के प्रश्न पत्र छापने का काम दिया गया था।‌ जांच अधिकारियों ने प्रिंटिंग प्रेस स्थल का दौरा कर एक आंतरिक जांच पाया कि यहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहीं थे।

अब सवाल यह उठने लगे हैं कि आखिर लाखों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों की गिरफ्तारी अभी तक क्यों नहीं हुई। स्कूली शिक्षा शिक्षा की बुनियाद मानी जाती है और यहीं से गड़बड़ी होगी तो प्रदेश के बच्चों का भविष्य कितना उज्ज्वल होगा, यह बताने की जरूरत नहीं है। सूत्र बताते हैं कि स्कूली शिक्षा में जबरदस्त धांधली चल रही है। हर जिले में मेरा आदमी तेरा आदमी टाइप के डीपीसी बैठा रखे हैं जो अपनी मनमानी से लूट मचा रखी है। निजी स्कूलों के संचालकों को धमकाया जा रहा है और खुलेआम कहा जा रहा है कि पैसे नहीं दोगे तो स्कूल चलाना मुश्किल हो जाएगा। डीपीसी कहते हैं कि शिकायत कहीं भी कर लो कुछ नहीं होने वाला है।

हमारी ऊपर तक पहुंच है। सोचिए जब किसी विभाग के प्रमुख इस तरह की भाषा का प्रयोग करने लगे तो आम आदमी को समझने में देर नहीं लगती है कि शिक्षा विभाग में क्या चल रहा है। यह सिर्फ एक जिले की बात नहीं है। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के सभी जिलों में डीपीसी के माध्यम से लूट का घिनौना खेल चल रहा है और इस खेल में शिक्षक और बच्चे दोनों पिस रहे हैं लेकिन शिक्षा विभाग अंजान बने हुए हैं। तबादले को लेकर विभाग के पास कोई ठोस नीति नहीं है। तबादले के नाम पर कर्मचारियों से लाखों रुपए मांगे जा रहे हैं। कर्मचारी संगठन द्वारा विरोध के बावजूद शिक्षा विभाग मनमानी पर उतरा हुआ है।
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बड़े निवेश दो साल में हुए कम
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बड़े निवेश को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में जो खुलासे किए गए हैं वह चौंकाने वाला है। सर्वे में बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में बड़े निवेश कम हुए हैं जबकि सरकार दावा कर रही है कि बड़े निवेश हुए हैं। आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि 2022-23 में जहां 27 बड़े निवेश प्रस्तावों से 57 हजार 333 करोड़ का निवेश आया था, ये 2024-25 में घटकर केवल 2 हजार करोड़ रह गया है। स्थिति यह है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले 9 महीनों में सिर्फ 14 हजार करोड़ के बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं। मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 की नई निवेश नीति लागू है और इसमें सस्ती जमीन , कम बिजली दर सहित कई तरह के इंसेंटिव दिए गए हैं। इसमें बिजली पानी और स्टाम्प ड्यूटी की दरों में 100 प्रतिशत तक की छूट जैसे इंसेंटिव शामिल हैं लेकिन इसके बावजूद उद्योगपति यहां निवेश करने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे तो सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
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अधिक दामों पर बिका यूरिया
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खेती किसानी वाला मध्यप्रदेश में किसानों को यूरिया खाद के लिए दर-दर भटकना पड़ता है तो यह अहम सवाल है कि आखिर गड़बड़ी करने वालों पर सरकार नरम क्यों है। सदन में सरकार ने अपने जवाब में खुद माना है कि प्रदेश में यूरिया अधिक दामों पर बिका है‌। खाद के साथ दूसरे उत्पाद किसानों को जबरदस्ती बेचे गए हैं। विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने सरकार को सदन में घेरा तो सरकार ने यह स्वीकार किया कि यूरिया खाद वितरण में धांधली हुई है। प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने सदन को बताया कि 48 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि 39 व्यापारियों द्वारा तय दर से अधिक मूल्य पर खाद बेचने और 9 मामलों में खाद के साथ कीटनाशक या नैनो यूरिया जैसे उत्पाद बेचने की गड़बड़ियां सामने आई है।
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रेरा की अनुमति बिना निर्माण की स्वीकृति कैसे
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पीएम आवास योजना का प्रोजेक्ट नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण धीमी गति से चल रहा है। कोई पूछने वाला नहीं है कि जिस प्रोजेक्ट को डेढ़ साल में पूरा करना था वह ढाई साल बाद भी अधूरा कैसे है। अरेड़ी ग्राम पंचायत में नगर निगम की ओर से पीएम आवास योजना प्रोजेक्ट की शुरुआत जनवरी 2023 में की गई थी। इसमें 130 कुल आवास बनाए जाने हैं, जिनमें 56 और 74 डुप्लैक्स हैं। यहां फ्लैट और डुप्लैक्स का निर्माण जुलाई 2025 तक पूरा हो जाना था। हैरानी की बात यह है कि करोड़ों के इस प्रोजेक्ट का निर्माण रेरा की अनुमति के बिना ही जारी रहा। जबकि बिना रेरा पंजीयन के प्रोजेक्ट चलाना गंभीर प्रशासनिक चूक माना जाता है। अब जब प्रोजेक्ट पर सवाल उठे तो जनवरी 2026 में नगर निगम के अधिकारियों ने आनन-फानन में आवासों के निर्माण के लिए रेरा परमिशन के लिए दस्तावेज जमा किए हैं। रखे हैं जो अपनी मनमानी से लूट मचा रखी है। निजी स्कूलों के संचालकों को धमकाया जा रहा है और खुलेआम कहा जा रहा है कि पैसे नहीं दोगे तो स्कूल चलाना मुश्किल हो जाएगा। डीपीसी कहते हैं कि शिकायत कहीं भी कर लो कुछ नहीं होने वाला है। हमारी ऊपर तक पहुंच है। सोचिए जब किसी विभाग के जिला अधिकारी इस तरह की भाषा का प्रयोग करने लगे तो आम आदमी को समझने में देर नहीं लगती है कि शिक्षा विभाग में क्या चल रहा है। यह सिर्फ एक जिले की बात नहीं है। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के सभी जिलों में डीपीसी के माध्यम से लूट का घिनौना खेल चल रहा है और इस खेल में शिक्षक और बच्चे दोनों पिस रहे हैं लेकिन शिक्षा विभाग अंजान बने हुए हैं। तबादले को लेकर विभाग के पास कोई ठोस नीति नहीं है। तबादले के नाम पर कर्मचारियों से लाखों रुपए मांगे जा रहे हैं। कर्मचारी संगठन द्वारा विरोध के बावजूद शिक्षा विभाग मनमानी पर उतरा हुआ है।
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बड़े निवेश दो साल में हुए कम
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बड़े निवेश को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में जो खुलासे किए गए हैं वह चौंकाने वाला है। सर्वे में बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में बड़े निवेश कम हुए हैं जबकि सरकार दावा कर रही है कि बड़े निवेश हुए हैं। आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि 2022-23 में जहां 27 बड़े निवेश प्रस्तावों से 57 हजार 333 करोड़ का निवेश आया था, ये 2024-25 में घटकर केवल 2 हजार करोड़ रह गया है। स्थिति यह है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले 9 महीनों में सिर्फ 14 हजार करोड़ के बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं। मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 की नई निवेश नीति लागू है और इसमें सस्ती जमीन , कम बिजली दर सहित कई तरह के इंसेंटिव दिए गए हैं। इसमें बिजली पानी और स्टाम्प ड्यूटी की दरों में 100 प्रतिशत तक की छूट जैसे इंसेंटिव शामिल हैं लेकिन इसके बावजूद उद्योगपति यहां निवेश करने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे तो सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
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सरकार ने माना-अधिक दामों पर बिका यूरिया
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खेती किसानी वाला मध्यप्रदेश में किसानों को यूरिया खाद के लिए दर-दर भटकना पड़ता है तो यह अहम सवाल है कि आखिर गड़बड़ी करने वालों पर सरकार नरम क्यों है। सदन में सरकार ने अपने जवाब में खुद माना है कि प्रदेश में यूरिया अधिक दामों पर बिका है‌। खाद के साथ दूसरे उत्पाद किसानों को जबरदस्ती बेचे गए हैं। विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने सरकार को सदन में घेरा तो सरकार ने यह स्वीकार किया कि यूरिया खाद वितरण में धांधली हुई है। प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने सदन को बताया कि 48 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि 39 व्यापारियों द्वारा तय दर से अधिक मूल्य पर खाद बेचने और 9 मामलों में खाद के साथ कीटनाशक या नैनो यूरिया जैसे उत्पाद बेचने की गड़बड़ियां सामने आई है।
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रेरा की अनुमति बिना निर्माण की स्वीकृति कैसे
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पीएम आवास योजना का प्रोजेक्ट नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण धीमी गति से चल रहा है। कोई पूछने वाला नहीं है कि जिस प्रोजेक्ट को डेढ़ साल में पूरा करना था वह ढाई साल बाद भी अधूरा कैसे है। अरेड़ी ग्राम पंचायत में नगर निगम की ओर से पीएम आवास योजना प्रोजेक्ट की शुरुआत जनवरी 2023 में की गई थी। इसमें 130 कुल आवास बनाए जाने हैं, जिनमें 56 और 74 डुप्लैक्स हैं। यहां फ्लैट और डुप्लैक्स का निर्माण जुलाई 2025 तक पूरा हो जाना था। हैरानी की बात यह है कि करोड़ों के इस प्रोजेक्ट का निर्माण रेरा की अनुमति के बिना ही जारी रहा। जबकि बिना रेरा पंजीयन के प्रोजेक्ट चलाना गंभीर प्रशासनिक चूक माना जाता है। अब जब प्रोजेक्ट पर सवाल उठे तो जनवरी 2026 में नगर निगम के अधिकारियों ने आनन-फानन में आवासों के निर्माण के लिए रेरा परमिशन के लिए दस्तावेज जमा किए हैं।

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