तेहरान/रियाद | अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए जा रहे भीषण हमलों का आज चौथा दिन है। इस युद्ध ने पूरे मध्य पूर्व में हाहाकार मचा दिया है, जिससे वैश्विक हवाई सेवा और तेल की कीमतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने कूटनीतिक बातचीत की इच्छा जाहिर की है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब बातचीत का समय निकल चुका है और ईरान को अपने किए का अंजाम भुगतना होगा। इस बयान ने युद्ध के और लंबा खिंचने के संकेत दे दिए हैं।
युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों तक फैल गई है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया गया है, जिससे दूतावास परिसर में भीषण आग लग गई। इस हमले में हुए जान-माल के नुकसान का सटीक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इसने खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी राजनयिकों और सुरक्षा बलों के बीच हड़कंप मचा दिया है। ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए इजराइल पर भी ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी हैं। अमेरिका और इजराइल ने स्वीकार किया है कि इन हमलों से उन्हें भी रणनीतिक स्तर पर काफी नुकसान उठाना पड़ा है।
इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने वैश्विक बाजार को अस्थिर कर दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने खाड़ी देशों के ऊपर से अपनी उड़ानें बंद कर दी हैं, जिससे यात्रा और माल ढुलाई महंगी हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई मध्यस्थता नहीं हुई, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। भारत सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और वहां फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रही है।

