मॉस्को/नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और ईरान द्वारा ‘होर्मुज की खाड़ी’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी के बाद वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है। चूंकि दुनिया का 20% तेल इसी संकीर्ण रास्ते से गुजरता है, खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति ठप होने की कगार पर है। इस संकट के बीच रूस ने दावा किया है कि भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने में फिर से “नई दिलचस्पी” दिखाई है। अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करने वाले भारत के लिए रूस अब एक अनिवार्य वैकल्पिक बाजार बनकर उभरा है।
रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने मॉस्को में मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें भारत से तेल की खरीद बढ़ाने के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। हाल के महीनों में पश्चिमी दबाव के कारण रूसी तेल के आयात में जो कमी आई थी, वह अब मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण फिर से तेजी पकड़ सकती है। हालांकि, रूसी मीडिया के अनुसार, इस संकट का फायदा उठाकर मॉस्को उन “भारी डिस्काउंट” को कम कर सकता है, जो वह अब तक भारत को देता रहा था। भारत के लिए चुनौती अब तेल की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना है।
ऊर्जा संकट की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रूस अब यूरोपीय संघ (EU) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में भी ढील मिलने की उम्मीद कर रहा है। यदि होर्मुज जलमार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत सरकार वर्तमान में अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक चैनलों का इस्तेमाल कर रही है। घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखना सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है, क्योंकि महंगे आयात का सीधा असर देश की महंगाई दर पर पड़ेगा।

