मनमानी: आरईएस के लोक सूचना अधिकारी नही देते आरटीआई की जानकारी

सीधी । कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा संभाग सीधी में पदस्थ लोक सूचना अधिकारी द्वारा निर्धारित तिथि के बाद भी सूचना का अधिकार अधिनियम की जानकारी नही दी जाती। मनमानी यह है कि आरईएस के लोक सूचना अधिकारी आरटीआई की जानकारी नही देते।

दरअसल आवेदनकर्ता ए.एन.सिंह द्वारा ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा संभाग सीधी में 10 नवम्बर 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा (6)(1) के अंतर्गत निर्धारित प्रारूप में आवेदन देकर जानकारी मांगी गई थी। आवेदन के साथ आवश्यक पोस्टल आर्डर भी लगाया गया था। मांगी गई जानकारी में ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा संभाग सीधी में वर्ष 2019 से वर्ष 2024 तक समस्त वर्कआर्डर एवं वर्कआर्डर में जमा एफडीआर तथा डीडी की चालान स्लिप की सत्यप्रति प्रमाणित मांगी गई थी। उक्त आवेदन देने के निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी आरईएस के लोक सूचना अधिकारी राजभान तिवारी द्वारा वांछनीय जानकारी उपलब्ध नहीं करायी जा रही है। आवेदक द्वारा लोक सूचना अधिकारी से संपर्क करने पर गोलमाल जवाब दिया जाता है। ऐसा आभाष हो रहा है कि आरईएस विभाग में शासन का सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 पूरी तरह से बेअसर है। इस मामले में सूचना अधिकारी की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध है। इनके द्वारा किसी भी तरह की जानकारी आरटीआई के तहत आवेदन लगने पर देने में आवेदक को गुमराह किया जाता है।

हालात यह है कि सीएम हेल्पलाइन में दर्ज होने वाली विभागीय शिकायतों का निराकरण कराने की बजाय झूठी जानकारी पोर्टल में प्रविष्ट कराई जाती है। लोक सूचना अधिकारी की यह मनमानी उनके कार्यकाल में शुरू से बनी हुई है। हैरत की बात तो यह है कि इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इन पर कार्रवाई करने की बजाय मेहरबान बने हुये हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि विभागीय अधिकारियों का संरक्षण भी इनको मिला हुआ है। जिससे सही जानकारी आरटीआई के तहत आवेदक को ना मिले। आरईएस विभाग में वर्कआर्डर के नाम पर आरंभ से ही काफी खेल हो रहा है। यह मनमानी वर्ष 2019 से लेकर वर्ष 2024 तक सबसे ज्यादा बनी रही है। वर्कआर्डर के नाम पर संबंधित ठेकेदारों से सांठगांठ कर औपचारिक रूप से ही कार्य कराने की सिलसिला प्रारंभ रहा है। इसी वजह से अधिकांश कार्यों का वजूद खत्म हो चुका है।

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लोक सूचना अधिकारी की मनमानी से विभाग की खराब हो रही छवि

ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा संभाग सीधी के लोक सूचना अधिकारी राजभान तिवारी के कृत्यों के चलते विभाग की छवि काफी खराब हो रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इनके पास लोक सूचना अधिकारी का दायित्व आने के बाद से ही पूरी तरह से स्वेच्छाचारी बने हुये हैं। आवेदक को जानकारी देने के नाम पर कार्यालय का चक्कर कटवाया जाता है। आवेदक के संपर्क करने पर मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने की बजाय उसको गुमराह करने का प्रयास किया जाता है। निर्धारित समयसीमा व्यतीत होने के बाद भी मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं करायी जाती।

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जानकारी दिये तो खुल सकती है कई गड़बडिय़ों की पोल

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदनकर्ता ए.एन.सिंह के द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में लोक सूचना अधिकारी के पसीने छूट रहे हैं। उनको यह अच्छे से मालूम है कि ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा संभाग सीधी में वर्ष 2019 से वर्ष 2024 तक समस्त वर्क आर्डर में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। वर्कआर्डर से मिलने वाले कार्य भले ही मौके पर आधे-अधूरे रहे हों लेकिन लाखों का भुगतान भारी भरकम कमीशन लेकर किया गया है। यदि यह जानकारी दी गई तो विभाग में हुई गड़बडिय़ों की पोल खुल सकती है और कई विभागीय अधिकारी कार्रवाई की जद में आयेंगे।

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इनका कहना है

मैं रास्ते में ट्रेन में सफर कर रहा हूं। तत्संबंध में आवश्यक जानकारी ईई से आप प्राप्त कर सकते हैं।

 

राजभान तिवारी, लोक सूचना अधिकारी आरईएस सीधी

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