नेपाल चुनाव: 5 मार्च को प्रधानमंत्री चुनने के लिए 1.9 करोड़ मतदाता डालेंगे वोट

नयी दिल्ली, 02 मार्च (वार्ता) नेपाल में नयी सरकार चुनने के लिए 5 मार्च को मतदान होगा जिसमें लगभग 1.9 करोड़ लोग हिस्सा लेंगे।

सितंबर 2025 में युवाओं के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के जरिये सरकार गिराये जाने के बाद देश में प्रतिनिधि सभा के लिए यह पहला आम चुनाव हो रहा है।

छात्र विद्रोह के बाद से इस गणतंत्र का नियंत्रण पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के हाथ में है। वर्ष 1959 में हुए पहले चुनाव के बाद से यह नेपाल का 9वां संसदीय चुनाव होगा।

हिमालय के करीब बसे इस देश में मिश्रित चुनावी प्रणाली लागू है। जिसे इसके 2015 के संविधान में पेश किया गया था।

इस चुनाव में कई दिग्गज राजनेता अपना भाग्य आजमा रहे हैं जिन पर नजर रखना मौजूं होगा। पारंपरिक दलों के नेताओं के अलावा नेपाल की राजधानी काठमांडू के 35 वर्षीय पूर्व मेयर बालेन्द्र शाह उनमें से एक हैं। ‘बालेन’ के नाम से मशहूर इस पूर्व रैपर का मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से है। श्री ओली ने पिछले सितंबर में हिमालयी गणतंत्र में लंबे समय से व्याप्त भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता के खिलाफ बढ़ते जन आक्रोश के बीच इस्तीफा दे दिया था।

अधिकतर राजनीतिक दलों ने अपने घोषणापत्रों में बेहतर शासन, भ्रष्टाचार से निपटने और बेरोजगारी कम करने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया है। इसे उन हताशाओं की स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा रहा है, जिनके कारण पिछली सरकार का पतन हुआ था।

चुनाव अभियान मुख्य रूप से ‘जेन जेड (जेन जी) आंदोलन’ की मांगों पर केंद्रित है, जिसमें जवाबदेही (सार्वजनिक अधिकारियों की संपत्ति की जांच और स्थानिक भ्रष्टाचार को समाप्त करना), रोजगार (नौकरी के अवसर पैदा कर काम की तलाश में विदेश जाने वाले युवाओं के बड़े पलायन को रोकना) और संरचनात्मक सुधार (जिसमें सीधे निर्वाचित कार्यकारी, प्रधानमंत्रियों के लिए कार्यकाल की सीमा और सत्ता के विकेंद्रीकरण के प्रस्ताव शामिल हैं) पर जोर दिया जा रहा है।

इन चुनावों में कई राजनीतिक दल शिरकत कर रहे हैं। नेपाली कांग्रेस पार्टी अपने प्रमुख गगन थापा के नेतृत्व में 2026 का चुनाव लड़ रही है। पार्टी का अभियान नयी पीढ़ी के नेतृत्व संभालने और पार्टी की छवि ‘नवीनीकृत’ पार्टी के रूप में पेश करने पर केंद्रित है। पार्टी के घोषणापत्र में सुशासन, प्रशासनिक दक्षता और सख्त कार्यकाल सीमा पर केंद्रित संरचनात्मक सुधारों का आह्वान किया गया है। इसमें राष्ट्रपति के लिए एक कार्यकाल, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के लिए दो, मंत्रियों के लिए तीन और पार्टी सूची वाले सांसदों के लिए एक कार्यकाल की सीमा का प्रस्ताव दिया गया है।

सीपीएन (यूएमएल) पार्टी ने 18 दिसंबर 2025 को अपना 11वां महाधिवेशन आयोजित किया और सीपीएन (यूएमएल) के अध्यक्ष के.पी. शर्मा ओली को फिर से अध्यक्ष चुना। इसके बाद श्री ओली को प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार भी घोषित किया गया। पार्टी के घोषणापत्र में व्यापक सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क के साथ एक कल्याणकारी व्यवस्था का वादा किया गया है।

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी का गठन सीपीएन (माओवादी केंद्र), सीपीएन (एकीकृत समाजवादी) और आठ अन्य वामपंथी समूहों के विलय से हुआ था। पार्टी ने 10 फरवरी को अपना घोषणापत्र जारी किया, जो सुशासन, रोजगार सृजन, समाज कल्याण और संस्थागत सुधारों पर केंद्रित है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने काठमांडू के स्वतंत्र मेयर बालेन शाह को पार्टी में शामिल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं, जिन्होंने 2025 में ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था और उन्हें पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।

पार्टी का घोषणापत्र नौकरशाही को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से संवैधानिक संशोधनों और संस्थागत सुधारों की वकालत करता है। पार्टी ने सीधे निर्वाचित कार्यकारी प्रमुख और पूर्णतः समानुपातिक संसद की ओर बढ़ने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही शक्तियों के पृथक्करण की बात कही है, जिससे कि विधायकों को कैबिनेट सदस्य बनने से रोका जा सके।

राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी के घोषणापत्र में संवैधानिक राजतंत्र की वापसी, धार्मिक स्वतंत्रता के साथ सनातन हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना और संघीय व्यवस्था को समाप्त करने का आह्वान किया गया है। इसके बजाय, पार्टी केंद्र सरकार और मजबूत, गैर-दलीय स्थानीय सरकारों वाली द्वि-स्तरीय शासन संरचना के पक्ष में है।

जनता समाजवादी पार्टी नेपाल में नामांकन की समय सीमा से पहले लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी-नेपाल, तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी और जनता प्रगतिशील पार्टी का विलय हो गया। इस पार्टी ने 26 जनवरी 2026 को 27-सूत्रीय घोषणापत्र जारी किया, जो संघीय ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित था। इसने जातीय पहचान सुनिश्चित करने के लिए 2012 के उच्च स्तरीय राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर संघीय मॉडल लागू करने की वकालत की। घोषणापत्र में मधेश और जनजाति आंदोलनों के साथ-साथ 2025 के ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शनों की मांगों को शामिल करते हुए संवैधानिक संशोधनों का आह्वान किया गया है।

प्रगतिशील लोकतान्त्रिक पार्टी का गठन सीपीएन (माओवादी केंद्र) के उन नेताओं ने किया है, जो नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के गठन से असहमत थे। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई के नेतृत्व वाली नेपाल समाजवादी पार्टी (नया शक्ति) और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के पूर्व मुख्य सचेतक संतोष परियार भी शामिल हुए। पार्टी के घोषणापत्र में सीधे निर्वाचित राष्ट्रपति प्रणाली, प्रांतीय प्रमुखों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव और पूर्णतः समानुपातिक चुनावी प्रणाली की ओर बढ़ने का आह्वान किया गया है। पार्टी ने संघीय संसद को केवल विधायी कार्यों तक सीमित रखने और कार्यकारी प्रमुख की ओर से चुनी गई कैबिनेट बनाने का प्रस्ताव दिया है।

उज्यालो नेपाल पार्टी का गठन चुनावों की घोषणा के बाद किया गया था। 15 फरवरी 2026 को पार्टी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया, जिसका लक्ष्य ‘विकास दशक’ है। पार्टी ने प्रशासन के आकार में भारी कटौती का प्रस्ताव दिया है, जिसमें संघीय सांसदों की संख्या घटाकर 201 और प्रांतीय सांसदों की संख्या 330 करने की वकालत की गयी है। साथ ही, इसमें सीधे निर्वाचित मुख्यमंत्रियों और गैर-दलीय स्थानीय चुनावों का प्रस्ताव दिया गया है।

नेपाल में चुनावी प्रणाली दोहरी व्यवस्था का पालन करती है। कुछ सीटों का फैसला ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ (एफपीटीपी) द्वारा किया जाता है। इसका अर्थ है कि जिसे सबसे अधिक वोट मिलते हैं, वह सीट जीत जाता है। दूसरी प्रणाली समानुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) की है, जो किसी राजनीतिक दल को मिले वोटों के अनुपात पर विचार करती है। कुल 165 सीटें एफपीटीपी प्रणाली के माध्यम से भरी जायेंगी, जबकि शेष 110 सीटें पीआर के माध्यम से चुनी जायेंगी।

दोनों प्रणालियों को रखने का विचार समाज में समावेशिता के साथ-साथ समानुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना था। यह प्रणाली किसी भी एक दल के लिए पूर्ण बहुमत जीतना कठिन बना देती है, इसलिए चुनाव में जो भी शीर्ष पर आयेगा, उसे संभवतः गठबंधन में सरकार चलानी होगी।

इस चुनाव के महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। पड़ोसी देश भारत का अतीत में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के साथ तनावपूर्ण रिश्ता रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि श्री ओली ने सक्रिय रूप से चीन के साथ घनिष्ठ संबंधों को प्राथमिकता दी थी। माना जा रहा है कि अमेरिका भी हिमालय में नेपाल की रणनीतिक स्थिति के कारण इस चुनाव पर पैनी नजर रख रहा है।

नेपाल में चीन का बड़ा प्रभाव है और वह मतदान पर बारीकी से नजर रखेगा, क्योंकि उसे उम्मीद है कि भविष्य की कोई भी सरकार देश में उसके हितों का समर्थन करेगी, जिसमें बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) शामिल है।

नेपाल दोनों दिशाओं में सीमा पार बुनियादी ढांचे से जुड़ा हुआ है, जलविद्युत बांधों की बिजली लाइनें भारत को बिजली आपूर्ति करती हैं, जबकि चीन तिब्बत के रास्ते हिमालय के पार अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से जुड़ा है और उसने हवाई अड्डों तथा रेलवे में निवेश किया है।

लगभग दो दशकों तक नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य पर दिग्गज नेताओं का दबदबा रहा, जिनमें से कई पूर्व माओवादी विद्रोही थे, जिन्होंने 2006 में 10 साल के गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद से बारी-बारी से सत्ता संभाली।

पिछले सितंबर में अशांति सोशल मीडिया पर लगाये गये संक्षिप्त प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं के विरोध के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन इसे आर्थिक स्थिरता की कमी और भ्रष्टाचार पर व्यापक गुस्से ने और हवा दी।

जो भी जीतेगा, वह दो दशकों से भी कम समय में नेपाल का 16वां प्रधानमंत्री बनेगा, जो उस बार-बार होने वाली राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है, जिसने 2008 में राजशाही के उन्मूलन के बाद से इस हिमालयी राष्ट्र को चिह्नित किया है।

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