आईटीईआर से लेकर एआई तक गूंजा शोध और नवाचार का स्वर

जबलपुर: पं. कुंजीलाल दुबे प्रेक्षागृह में सुबह का दृश्य ऊर्जा, उत्साह और वैज्ञानिक जिज्ञासा से सराबोर नजर आया। मंच सुसज्जित था, सभागार में शोधार्थियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की उत्सुक उपस्थिति थी। अवसर था “सतत भविष्य के लिए विज्ञान शुद्ध और अनुप्रयुक्त अनुसंधान के संगम पर नवाचार” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान कार्यशाला के शुभारंभ का। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि आज भारत ने हर क्षेत्र में अपना वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित किया है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि वेद, उपनिषद, आयुर्वेद और योग जैसे प्राचीन स्रोतों ने गणित, खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक सोच को प्रभावित किया है। सभागार तालियों से गूंज उठा जब उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में भी योग और आयुर्वेद की प्रासंगिकता सिद्ध हो रही है।
फ्रांस-भारत वैज्ञानिक सहयोग पर विशेष व्याख्यान
विशेष अतिथि के रूप में इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च की डिविजनल हेड एवं साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. रंजना गंगराड़े ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फ्रांस में चल रहे कई प्रमुख वैज्ञानिक प्रयोगों में भारत की महत्वपूर्ण भागीदारी है। खासकर कृत्रिम सूर्य परियोजना—का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संलयन प्रयोग बताया। उनके व्याख्यान के दौरान स्क्रीन पर प्रदर्शित वैज्ञानिक चित्रों और आंकड़ों को विद्यार्थी गहरी रुचि से देखते रहे। कई शोधार्थी नोट्स बनाते नजर आए। सत्र के अंत में प्रश्नोत्तर के दौरान विद्यार्थियों ने एआई, परमाणु ऊर्जा और गहरे समुद्र अनुसंधान पर जिज्ञासाएं रखीं।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी
कार्यशाला संयोजक प्रो. राकेश बाजपेयी ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देश-विदेश के विशेषज्ञ विज्ञान के विभिन्न आयामों पर अपने शोध साझा करेंगे। तकनीकी सत्रों में जीवन विज्ञान, गणित, रसायन और भौतिकी के विषयों पर गहन विमर्श हुआ। पहले तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डीन, जीवन विज्ञान संकाय प्रो. एस.एस. संधू ने की। इस दौरान हैदराबाद से आए टेक उद्यमी पी.एस. तिवारी तथा पश्चिम बंगाल के कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रो. संजीव कुमार दत्ता ने भी अपने विचार रखे। बाद के सत्रों में गणित और रसायन विज्ञान के विशेषज्ञों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से शोधपत्र प्रस्तुत किए।
युवा वैज्ञानिकों में दिखा उत्साह
सभागार के बाहर पोस्टर प्रेजेंटेशन और अनौपचारिक चर्चाओं का सिलसिला भी चलता रहा। छात्र-छात्राएं विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर पाकर उत्साहित दिखे। कई विद्यार्थियों ने इसे अपने करियर के लिए प्रेरणादायक बताया। मंच पर प्रभारी कुलसचिव प्रो. सुरेन्द्र सिंह सहित वरिष्ठ प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। संचालन डॉ. दिव्या सिंह ने किया। आयोजन समिति के सदस्यों और क्रिस्प भोपाल की टीम ने व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखा

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