बेंगलुरु, 13 मई (वार्ता) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय ( एफआरआरओ) के व्हाटसएप के ज़रिए भेजे गये एक नोटिस की वैधता को सही ठहराया है। इस नोटिस में कथित तौर पर पिछले लगभग 15 सालों से टूरिस्ट वीज़ा पर कर्नाटक में एक रेस्टोरेंट चला रहे एक फ्रांसीसी नागरिक को देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था।
यह मामला तब सामने आया, जब उस विदेशी नागरिक ने एफआरआरओ की कार्रवाई को चुनौती दी। उसने तर्क दिया कि व्हाटसएप के ज़रिए किया गया संचार नोटिस भेजने का कोई वैध कानूनी तरीका नहीं है और देश छोड़ने का निर्देश प्रक्रिया संबंधी नियमों का उल्लंघन करता है।
न्यायालय ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि डिजिटल संचार के तरीके कानूनी रूप से मान्य हैं, बशर्ते वे नोटिस की प्रभावी डिलीवरी और उसकी प्राप्ति की पुष्टि सुनिश्चित होती हो। इन तरीकों में व्हाटसएप भी शामिल है। न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रक्रिया का रूप मूल नियमों के पालन पर हावी नहीं हो सकता, खासकर उन मामलों में जिनमें वीज़ा नियमों का उल्लंघन और तय समय से ज़्यादा रुकने की बात हो।
याचिका के विवरण के अनुसार, फ्रांसीसी नागरिक शुरू में टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आया था, लेकिन कथित तौर पर उसने तय समय सीमा से ज़्यादा समय तक भारत में रहना जारी रखा और कर्नाटक में लंबे समय तक रेस्टोरेंट का कारोबार किया। अधिकारियों ने बाद में इस लंबे समय तक तय सीमा से ज़्यादा रुकने और व्यावसायिक गतिविधि की पहचान करने के बाद कार्रवाई शुरू की। यह दोनों ही चीज़ें टूरिस्ट वीज़ा की शर्तों के तहत अनुमत नहीं हैं।
