
जबलपुर। हाईकोर्ट के निर्देश पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की तरफ से टाइगरों की मौत के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गयी। रिपोर्ट में बताया गया कि विगत 21 नवम्बर से 2 फरवरी तक कुल आठ टाइगरों की मौत हुई है। जिसमें चार टाइगरों की मौत प्राकृतिक थी तथा चार टाइगरों की मौत करंट के कारण हुई थी। करंट लगने की सभी घटना सामान्य वन्य क्षेत्र में घटित हुई है। युगलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को स्टेट्स रिपोर्ट पर जवाब पेश करने के निर्देश जारी करते हुए अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की गयी है।
स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व दो टाइगर की मौत आपसी संघर्ष के कारण हुई तथा एक-एक टाइगर की मौत कुएं में डूबने तथा प्राकृतिक बीमारी से हुई है। कोर व बफर क्षेत्र में स्थित विद्युत लाइन के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली लाइन की सुदृढीकरण व वन्यजीव सुरक्षा मानकों के पालन हेतु विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता को समय-समय पर पत्र लिखे गये है। इसके अलावा रिपोर्ट में पेट्रोलिंग व रात्रिकालीन गश्त के संबंध में भी जानकारी पेश की गयी। सरकार की तरफ से मुख्य याचिका पर भी जवाब पेश किया गया।
गौरतलब है कि भोपाल निवासी वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि दुनिया में टाइगर की कुल आबादी 5,421 है। जिसमें से भारत में 3167 टाइगर हैं और देश में सबसे अधिक मध्य प्रदेश में 785 टाइगर हैं। टागईर स्टेट होने के बावजूद भी साल 2025 में मध्य प्रदेश में 54 टाइगर की मौत हुई है। प्रदेश में साल 2022 में 43 मौतें,साल 2023 में 45 मौतें, साल 2024 में 46 मौतें हुई थी। देश में टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 1973 में मौत हुई थी। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद प्रदेश में सबसे अधिक टाइगरों की मौत साल 2025 में हुई है। सरकारी घोषणा बाघों की संख्या में बढ़ोतरी की तारीफ़ कर रही हैं। जंगलों में बाघ रहस्यमयी और अक्सर संदिग्ध हालात में मर रहे हैं। याचिका में कहा गया था कि वन अधिकारियों बाघों की मौतों को वजह इलाके की लड़ाई में आपसी संघर्ष बताते है। वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट का मानना है कि प्रदेश में बाघों के साथ ही बड़ी संख्या में तेंदुए भी मारे जा रहे हैं। बिजली के तारों का इस्तेमाल करके रिज़र्व के अंदर शिकारी काम कर रहे हैं और वन विभाग का सर्विलांस और इंटेलिजेंस सिस्टम फेल हो रहा है।
पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया था कि इस साल प्रदेश में 10 टाइगरों की मौत हुई है। इसमें से 7 टाइगरों की मौत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हुई है। जिनमें से अधिकांश मौत करंट व अन्य अप्राकृतिक कारण से हुई है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को टाइगरों की मौत के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये थे। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी की तरफ से पैरवी की गयी।
