ढाका, 23 फरवरी (वार्ता) बंगलादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कहा है कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने संवैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया और श्री युनूस ने उन्हें पद से हटाने के लिए साजिश भी रची । उन्होंने आरोप लगाया कि न तो उन्हें विदेश दौरों की जानकारी दी गयी और न ही राज्य के मामलों पर कोई जानकारी उपलब्ध करवाई गयी थी। कालेर कंठ अखबार ने श्री शहाबुद्दीन के हवाले से कहा कि मुख्य सलाहकार कई बार विदेश गए, लेकिन लौटने के बाद कभी राष्ट्रपति से मुलाकात नहीं की और न ही किसी तरह की लिखित रिपोर्ट सौंपी, जबकि यह उनका संवैधानिक दायित्व था। राष्ट्रपति ने कहा, “मुख्य सलाहकार ने संविधान के किसी भी प्रावधान का पालन नहीं किया। जब भी वह विदेश जाते थे, उन्हें लौटकर राष्ट्रपति से मिलना और परिणामों की जानकारी लिखित रूप में देना चाहिए था। वह 14 से 15 बार विदेश गये, लेकिन एक बार भी मुझे सूचना नहीं दी। वह कभी मुझसे मिलने नहीं आये।”
श्री शहाबुद्दीन ने कहा कि उस अवधि में उन्हें “पूरी तरह अंधेरे में रखा गया” और कोसोवो तथा कतर की उनकी प्रस्तावित दो विदेश यात्राएं भी रोक दी गयीं। श्री शहाबुद्दीन ने तत्कालीन राजनीतिक तनाव का उल्लेख करते हुए कहा, “उस स्थिति में मुझे डॉ. यूनुस का एक भी फोन कॉल नहीं आया। वह न तो मेरे पक्ष में थे और न ही मेरे खिलाफ। स्वाभाविक रूप से मैंने भी उनसे किसी तरह की मदद नहीं मांगी।” उन्होंने कहा कि कूटनीतिक हलकों ने भी उन्हें असंवैधानिक तरीके से हटाने का विरोध किया, जिसे उन्होंने “एक बड़ी ताकत” बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि 2024 के उग्र छात्र आंदोलन के बाद अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें हटाने के बार-बार प्रयास किये गये, लेकिन सेना और बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के समर्थन से संवैधानिक निरंतरता बनी रही।
उन्होंने कहा, “एक समय तो मुझे हटाकर असंवैधानिक तरीके से एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को राष्ट्रपति पद पर बैठाने की साजिश भी रची गयी, लेकिन उस न्यायाधीश ने संविधान का हवाला देते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया।” श्री शहाबुद्दीन ने 22 अक्टूबर 2024 की रात बंगभवन के बाहर हुए प्रदर्शनों को “डरावनी रात” बताते हुए कहा कि भीड़ को उकसाया गया, राष्ट्रपति आवास को लूटने की कोशिशें हुईं, जिन्हें बाद में सेना की तैनाती से नियंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि विदेशों में बंगलादेश मिशनों से उनके चित्र हटाया जाना भी उन्हें पद से हटाने के प्रयासों का संकेत था। राष्ट्रपति ने कहा “अपमानजनक परिस्थितियों” के बावजूद उन्होंने संविधान की निरंतरता की रक्षा के लिए दृढ़ता बनाए रखी।

