मैंने पुस्तकों पर कभी भी प्रतिबंध नहीं लगाया : उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर, 8 अगस्त (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि उन्होंने कभी भी किसी भी पुस्तक पर प्रतिबंध नही लगाया है और ना भविष्य में कभी ऐसा करेंगे।

वह कल रात एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें उनसे “पुस्तकों पर लगाये गए प्रतिबंध हटाने” का आग्रह किया गया था। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ही प्रशंसित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय लेखकों की 25 पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाया है।

सोशल मीडिया पर सक्रिय एक इंटरनेट उपयोगकर्ता ने श्री अब्दुल्ला को टैग करते हुए लिखा “किताबों से प्रतिबंध हटाओ। ज़िंदगी भर तुम किताबों से डरने वाले कायर के रूप में जाने जाओगे। किताबों पर से प्रतिबंध हटाओ।”

इस पर अपनी प्रतिक्रिया में श्री अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने कभी भी पुस्तकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है और न ही कभी लगाएँगे।

श्री अब्दुल्ला ने ‘एक्स’ पर लिखा “मुझे कायर कहने से पहले अपने तथ्य ठीक कर लो, तुम अज्ञानी हो। यह प्रतिबंध उप राज्यपाल ने अपने एकमात्र आधिकारिक नियंत्रण वाले विभाग – गृह विभाग का इस्तेमाल करके लगाया है। मैंने कभी किताबों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है और न ही कभी लगाऊँगा।”

गौरतलब है कि पांच अगस्त को उप राज्यपाल प्रशासन ने कश्मीर पर लिखी 25 किताबों को यह कहते हुए जब्त कर लिया कि वे “जम्मू-कश्मीर के बारे में झूठे आख्यान और अलगाववाद” का प्रचार करती हैं।

प्रतिबंधित पुस्तकों में प्रसिद्ध संविधान विशेषज्ञ ए जी नूरानी की ‘द कश्मीर डिस्प्यूट 914-2012’, सुमंत्र बोस की ‘कश्मीर एट क्रॉसरोड्स’ और ‘कॉन्टेस्टेड लैंड्स’, डेविड देवदास की ‘इन सर्च ऑफ फ्यूचर – द कश्मीर स्टोरी’, अरुंधति रॉय की ‘आज़ादी’ और अनुराधा भसीन की ‘ए डिसमेंटल्ड स्टेट – द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कश्मीर आफ्टर आर्टिकल 370’ शामिल हैं।

इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कल कश्मीर घाटी में किताबों की दुकानों से प्रतिबंधित पुस्तकों को जब्त करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया।

 

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