उज्जैन से ग्वालियर तक चल रही जमीन की जंग

उज्जैन: सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में शासकीय और तकाआयमी जमीनों को लेकर जिला प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है. पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच कर ऐसी जमीनों को पुनः शासन के कब्जे में लेने की कानूनी प्रक्रिया तेज की जा रही है. शहर में बेशकीमती जमीने भी इसी कड़ी का एक अहम प्रकरण बन चुकी है, जो फिलहाल राजस्व मंडल ग्वालियर न्यायालय में विचाराधीन है.

ऐसा ही एक मामला उज्जैन आगर रोड पर चरक अस्पताल के सामने स्थित ओंकार जिनिंग का भी चल रहा है, जिसमें एसडीएम एल एन गर्ग लगातार ग्वालियर जाकर ओंकार जिनिंग फैक्ट्री का फैसला जिला प्रशासन के हित में कराने के लिए प्रवास कर रहे हैं और यह जमीन यदि जिला प्रशासन को पुनः प्राप्त होती है तो यहां पर भी एक जनहित की बड़ी योजना बनाई जाएगी.

जमीनों पर फोकस
उज्जैन में महाकुंभ 2028 को देखते हुए उज्जैन जिला प्रशासन ने शासकीय भूमि के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति की मुहिम को प्राथमिकता दी है. प्रशासन का कहना है कि जिन जमीनों का राजस्व रिकॉर्ड शासन के नाम पर दर्ज है या जिनका पट्टा निरस्त हो चुका है, उन्हें दोबारा सरकारी उपयोग में लाया जाएगा. ओंकार जिनिंग को यह फैक्ट्री तकाआयमी कारखाने के लिए दी थी, जब जिला प्रशासन पूर्व में कैस जीत गया तो ग्वालियर राजस्व मंडल से फैक्ट्री संचालक को स्टे मिल गया, तब से ही दोबारा जिला प्रशासन ने केस लगाया.

135 हेक्टेयर जमीन का केस
ओंकार जिनिंग फैक्ट्री की लगभग 3.135 हेक्टेयर रकबे वाली यह जमीन सर्वे क्रमांक 1917 के अंतर्गत दर्ज है. पुराने खसरा अभिलेखों में इस भूमि का उल्लेख जीन प्रेस और कारखाना प्रविष्टि के रूप में मिलता है, जबकि वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में इसे शासकीय प्रविष्टि से जोड़ा गया है.

2011 में पट्टा निरस्त
राजस्व दस्तावेजों के अनुसार 11 मार्च 2011 को पारित आदेश में अपर कलेक्टर स्तर से संबंधित पट्टा निरस्त करते हुए भूमि को शासन में निहित माना गया था. आदेश में मध्यप्रदेश भूमि राजस्व संहिता 1959 की धारा 182 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि विवादित भूमि शासन की श्रेणी में आती है. इसके बाद आयुक्त स्तर पर भी आदेश को यथावत रखा गया.

रिव्यू पिटीशन दायर
ये प्रकरण राजस्व मंडल, ग्वालियर पहुंचा, जहां पूर्व संचालक पक्ष को स्थगन आदेश मिल गया. इसके चलते प्रशासनिक कब्जे की प्रक्रिया रुक गई. मामला उच्च न्यायालय तक भी गया, जहां से अंतरिम स्थगन के बाद प्रकरण पुनः अधीनस्थ न्यायालय में विचाराधीन है. वर्तमान में रिव्यू पिटीशन भी दायर की गई है.

प्रशासन का पक्ष- रिकॉर्ड में शासकीय
नवभारत से चर्चा में एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि शासन का तर्क है कि खसरा अभिलेख स्वयं में प्रमाणित दस्तावेज होते हैं और पुराने बंदोबस्त के आधार पर स्वामित्व का दावा विधिसम्मत नहीं माना जा सकता. नवीन सर्वेक्षण बंदोबस्त लागू होने के बाद पूर्व प्रविष्टियों का स्वतः अवसान माना जाता है. इसी आधार पर शासन ने पुनर्विलोकन याचिका प्रस्तुत की है.

विकास से जुड़ी संभावनाएं
यदि अंतिम आदेश जिला प्रशासन के पक्ष में आता है तो इस 3.135 हेक्टेयर भूमि पर महाकुंभ 2028 को ध्यान में रखते हुए जनहित की बड़ी योजना बनाई जा सकती है. क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां पार्किंग, यातायात प्रबंधन केंद्र, सार्वजनिक सुविधा परिसर या अन्य आधारभूत संरचना विकसित किए जाने की संभावना जताई जा रही है

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