
रीवा। रीवा के एक निजी अस्पताल की मनमानी पर न्यायालय ने शिकंजा कसते हुए एक बड़ा आदेश जारी किया है. बता दें कि जिन डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है, अब उन्हीं डॉक्टरो पर चिकित्सा एवं उपचार के नाम पर धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप है लगने लगे है.
ताजा मामला रीवा के बहुचर्चित वरदान हॉस्पिटल का सामने आया है, जिस पर कोर्ट ने धोखाधड़ी और गंभीर आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज करने का आदेश दिया है.
दरअसल यह पूरा मामला वरदान अस्पताल प्रबंधन डॉक्टर मुकेश यादव और डॉक्टर वंदना यादव से जुड़ा हुआ है. इस पूरे मामले को लेकर फरियादी वीरेंद्र त्रिपाठी पिता राम रहीम त्रिपाठी उम्र 35 वर्ष निवासी ग्राम चौरी बुढ़वा थाना देवलौंद जिला शहडोल ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके द्वारा वरदान अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था. बताया गया कि न्यायालय ने दायर किए गए परिवाद के मामले को गंभीरता से लेते हुए वरदान अस्पताल पीटीएस रोड रीवा दांत चिकित्सक डॉ मुकेश यादव एवं डॉक्टर वंदना सिंह यादव व अस्पताल प्रबंधन संचालक के खिलाफ धारा 125, 125 बी, 296, 351, 271 की सहपठित धारा 318 दो के तहत अपराध दर्ज करने का आदेश दिया है. पीडि़त और उनके अधिवक्ता अनूप प्रताप सिंह ने बताया कि फरियादी वीरेंद्र त्रिपाठी के दांत खराब हो गए थे, जिसके इलाज के लिए वह वरदान अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर मुकेश यादव और वंदना यादव ने दांतों का इंप्लांट करने की सलाह दी और इलाज के नाम पर पांच लाख रुपए वसूल कर लिए जिसकी बाकायदा रसीद की दी गई है. लेकिन आरोप है कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से असफल रहा. पीडि़त लगातार दर्द से तड़पता रहा, अस्पताल के चक्कर लगाता रहा, लेकिन कोई राहत नहीं मिली. आरोप है कि उल्टा डॉक्टरों द्वारा उन्हें पुलिस में फसाने की धमकियां दी जाने लगी. बाद में पीडि़त को भोपाल ले जाकर डॉक्टर पुष्कर से भी इलाज कराया गया लेकिन वहां भी ऑपरेशन सफल नहीं हुआ. पीडि़त का आरोप है कि यह इंप्लांट डॉक्टर द्वारा पहली बार किया गया था, यानी बिना पर्याप्त अनुभव के केवल पैसों के लालच में गंभीर चिकित्सा प्रक्रिया कर दी गई, इससे पीडि़त की हालत और बिगड़ती चली गई. सबसे हैरानी की बात यह रही कि पीडि़त ने कोतवाली थाना से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. लिहाजा न्यायालय के शरण में जाना पड़ा.
