नयी दिल्ली 20 फरवरी (वार्ता) भारत ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसने गाजा में शांति स्थापना और पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में पर्यवेक्षक के तौर पर हिस्सा लिया। यह बैठक गुरुवार को अमेरिका के वाशिंगटन में हुई थी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या भारत में इसमें औपचारिक रूप से शामिल होगा या नहीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इस संबंध में पूछे गये सवालों के जवाब में कहा कि भारत ने वाशिंगटन में आयोजित बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में एक पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने गाज़ा शांति योजना पहल और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत जारी प्रयासों का भी समर्थन किया है।
इस बैठक में भारतीय दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी नामग्या सी. खम्पा ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत ने इस बैठक में जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड और ब्रिटेन सहित कुछ और देशों की तरह पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया। विदेश मंत्रालय ने इससे पहले कहा था कि वह राष्ट्रपति ट्रंप की इस पहल में शामिल होने के निमंत्रण की समीक्षा कर रहा है।
इज़राइल, जॉर्डन, क़तर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान सहित 27 देशों ने औपचारिक रूप से इस बोर्ड में शामिल होने की घोषणा की है। कुछ देशों ने आशंका व्यक्त की है कि यह बोर्ड मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका को कमजोर कर सकता है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि नौ सदस्य देशों—कज़ाख़स्तान, अज़रबैजान, संयुक्त अरब अमीरात, मोरक्को, बहरीन, क़तर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने गाज़ा राहत पैकेज के लिए सामूहिक रूप से 7 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है।
