
भोपाल। विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले को लेकर लाए गए लगभग 10 स्थगन प्रस्ताव आज अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रस्तावों की ग्राह्यता पर चली लगभग डेढ़ घंटे की चर्चा के बाद अग्राह्य कर दिए।
अध्यक्ष तोमर ने स्थगन प्रस्तावों की ग्राह्यता को लेकर दोनों पक्षों की चर्चा सुनने के बाद कहा कि ये मामला आयोग में है और न्यायालय में विचाराधीन है। प्रकरण के संबंध में आयोग गठित हो गया है और उसने अपना काम भी शुरु कर दिया है। न्यायालय ने भी खुद संज्ञान में लेते हुए प्रकरण पर सुनवाई की है। इन सभी तथ्यों के आधार पर तोमर ने इन्हें अग्राह्य कर दिया।
हालांकि स्थगन प्रस्तावों के अग्राह्य होने की घोषणा होते ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत समूचे प्रतिपक्ष ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया। सिंघार ने कहा कि सरकार इस मामले में डर रही है और चर्चा से बच रही है। इसी बीच समूचे प्रतिपक्ष के विधायकों के विरोध के कारण हंगामे की स्थिति बन गई और सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
इसके पहले स्थगन प्रस्तावों की ग्राह्यता पर हुई चर्चा के दौरान सरकार की ओर से नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीतासरन शर्मा ने अपना पक्ष रखा।
कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे और पूर्व मंत्रियों लखन घनघोरिया, सचिन यादव और जयवर्धन सिंह ने ग्राह्यता के समर्थन में अपने तर्क दिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अध्यक्ष तोमर ने इन्हें अग्राह्य कर दिया।
चर्चा के दौरान मंत्री राकेश सिंह और उप नेता प्रतिपक्ष श्री कटारे के बीच हल्की नोंकझोंक भी हुई। श्री कटारे ने कहा कि नियम और संविधान पहले हैं, चाहे अध्यक्ष हों, मुख्यमंत्री हों या कोई और। सिंह ने इस पर आपत्ति जताई।
