नयी दिल्ली, 19 फरवरी (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर उनके नाम के आगे ‘स्वामी’ लगाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे ‘सांस्कृतिक दरिद्रता’ और ‘अशोभनीय’ बताया।
सुश्री बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं स्तब्ध हूं। एक बार फिर से हमारे प्रधानमंत्री ने बंगाल की महान हस्तियों के प्रति अपनी सांस्कृतिक असंवेदनशीलता को आक्रामक रूप से दिखाया है।”
उन्होंने कहा कि संत की जयंती पर श्रद्धांजलि देने की कोशिश में प्रधानमंत्री ने उनके नाम के आगे एक ऐसा और गलत उपसर्ग लगाया जो पहले कभी नहीं लगा। सुश्री बनर्जी ने रामकृष्ण आंदोलन के पारंपरिक संदर्भ पर जोर दिया और कहा कि श्री रामकृष्ण को लंबे समय से ‘ठाकुर’ के रूप में पूजा जाता रहा है, जिसका मतलब ‘भगवान’ है।
उन्होंने लिखा, “जैसा कि सब जानते हैं श्री रामकृष्ण को ठाकुर (असल में भगवान) के नाम से पूजा जाता था। वर्ष 1886 में रामकृष्ण के देहांत के बाद उनके मठवासी शिष्यों ने विधिवत रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन शुरू किया, जिसमें भिक्षुओं को परंपरागत रूप से ‘स्वामी’ कहा जाता था।”
सुश्री बनर्जी ने रामकृष्ण परंपरा की ‘पवित्र त्रिमूर्ति’ का जिक्र किया। उन्होंने त्रिमूर्ति में-ठाकुर (श्री रामकृष्ण), मां (पवित्र मां शारदा देवी) और स्वामीजी (स्वामी विवेकानंद) के होने का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, “मास्टर, आचार्य को खुद ठाकुर कहा जाता रहा।” उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया कि “बंगाल पुनर्जागरण के उन महान शख्सियतों को न छेड़ें, जिनकी आधुनिक भारत के निर्माण में प्रमुख भूमिका है।”
