नई दिल्ली | अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए होम लोन की अवधि का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण निर्णय होता है। यदि आप 1 करोड़ रुपये का लोन 8% ब्याज दर पर लेते हैं, तो समय सीमा के आधार पर आपकी EMI में बड़ा अंतर आता है। 15 साल के लिए आपकी मासिक किस्त 95,565 रुपये होगी, जबकि 20 साल के लिए यह घटकर 83,644 रुपये रह जाएगी। महानगरों में बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के बीच, विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोन लेने से पहले मासिक बजट का आकलन अनिवार्य है ताकि भविष्य में वित्तीय संकट का सामना न करना पड़े।
अक्सर लोग मासिक बोझ कम करने के लिए 30 साल की लंबी अवधि चुनते हैं, जिससे EMI घटकर 73,376 रुपये तो हो जाती है, लेकिन ब्याज का कुल खर्च चौंकाने वाला होता है। 30 साल की अवधि में आपको मूल राशि के अलावा करीब 1.64 करोड़ रुपये केवल ब्याज के रूप में चुकाने होंगे। इसके विपरीत, 15 साल की अवधि चुनने पर आप कुल ब्याज को मात्र 72 लाख रुपये तक सीमित कर सकते हैं। यह तुलना स्पष्ट करती है कि अवधि जितनी लंबी होगी, बैंक को दिया जाने वाला कुल भुगतान उतना ही अधिक होता जाएगा।
वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, आपकी होम लोन EMI आपकी कुल मासिक आय के 30 से 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। घर खरीदते समय केवल लोन की राशि ही नहीं, बल्कि रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और मेंटेनेंस जैसे छिपे हुए खर्चों को भी बजट में शामिल करना चाहिए। यदि भविष्य में आपकी आय बढ़ती है, तो ‘आंशिक प्री-पेमेंट’ (Partial Pre-payment) एक बेहतरीन विकल्प है। इससे न केवल आपके लोन की अवधि कम होती है, बल्कि आप ब्याज के रूप में दी जाने वाली एक मोटी रकम भी बचा सकते हैं।

