दिल्ली कोर्ट में सोनिया गांधी की ओर से जवाब: नागरिकता विवाद को बताया राजनीतिक साजिश

नई दिल्ली। नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े पुराने आरोपों को लेकर दायर निजी शिकायत पर सुनवाई के दौरान दिल्ली की अदालत में सोनिया गांधी की ओर से पेश वकील ने सभी आरोपों को पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने दलील दी कि शिकायत बाहरी कारणों से दाखिल की गई है और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि चार दशक से अधिक पुराने मामलों में विश्वसनीय साक्ष्य जुटाना व्यावहारिक रूप से असंभव है, इसलिए ऐसे “अत्यंत बासी” आरोपों पर आपराधिक कार्यवाही चलाना संविधान के अनुच्छेद 21 की भावना के विपरीत होगा। जवाब में यह भी रेखांकित किया गया कि शिकायत में जिन तथ्यों का उल्लेख है, उनके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज, प्रति या विस्तृत विवरण संलग्न नहीं किया गया।

वकील ने यह भी तर्क रखा कि निर्वाचन नामावली में नाम जोड़े जाने से संबंधित कथित आवेदन का न तो रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया और न ही उसकी प्रति हासिल करने के प्रयासों का कोई उल्लेख है। इसी तरह 1980 के दशक की घटनाओं का हवाला देते हुए 40 वर्ष बाद आपराधिक शिकायत दायर करने के औचित्य पर भी सवाल उठाए गए।

कानूनी जवाब में एक संवैधानिक पहलू भी उभरा, जिसमें कहा गया कि आपराधिक अदालतें निजी शिकायतों के जरिए चुनावी प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकतीं। ऐसा करना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विरुद्ध होगा और संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लंघन भी माना जा सकता है, जो चुनावी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप पर रोक लगाता है।

बचाव पक्ष का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोप किसी विश्वसनीय स्रोत पर आधारित नहीं हैं और मूलभूत साक्ष्य जुटाने के प्रयास भी प्रदर्शित नहीं किए गए। ऐसे में पूरे प्रकरण को राजनीतिक मंशा से प्रेरित बताते हुए शिकायत को खारिज करने की मांग की गई है।

 

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