लाहौर में दो दशक बाद लौटा बसंत

लाहौर, 07 फरवरी (वार्ता) पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर का आसमान बसंत के आगमन से एक बार फिर रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया। वसंत ऋतु का स्वागत करने वाले इस त्योहार पर 20 साल पहले प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ शरीफ़ ने इस साल आधिकारिक तौर पर इसे दोबारा शुरू करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की सदियों पुरानी संस्कृति का हिस्सा है। करीब 1.3 करोड़ लोगों की आबादी वाले इस शहर ने शुक्रवार और शनिवार को इस दो-दिवसीय त्योहार में हिस्सा लिया। पाकिस्तान में बसंत का इतिहास दरअसल बंटवारे से बहुत पहले के पंजाब से जुड़ा हुआ है। जाड़े के समापन की घोषणा करने वाले इस की जड़ें यूं तो हज़रत निज़ामुद्दीन और अमीर ख़ुसरो तक जाती हैं, लेकिन पंजाब में इसे सांस्कृतिक पहचान देने का श्रेय महाराजा रणजीत सिंह को जाता है, जिन्होंने 19वीं सदी की शुरुआत में इस क्षेत्र पर राज किया। इक्कीसवीं सदी में आते हुए यह त्योहार लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन गया, हालांकि पतंग उड़ाते हुए होने वाली दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण 20 साल पहले इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लाहौर के नीले आसमान को इंद्रधनुषी बना देने वाली पतंगें गायब हो गयी थीं। नतीजा यह रहा कि बच्चों के हाथ पतंगों में मांझा बांधना और उन्हें गगन के हवाले कर देना भी भूल गये।

जब पंजाब सरकार के ऐलान के बाद शुक्रवार आधी रात को यह त्योहार लौटा तो बच्चे-बूढ़े-जवान सब बड़ी तादाद में लाहौर की छतों पर इकट्ठा हो गये। मुख्यमंत्री मरयम नवाज़ ने कहा, “यह सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि पंजाब की सदियों पुरानी तहज़ीब और मार्मिकता का दर्पण है।” उन्होंने नागरिकों से इस त्योहार को जिम्मेदारी के साथ मनाने का आग्रह करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि लोग सुरक्षा का भी पूरा-पूरा ध्यान रखें। बसंत के साथ पारंपरिक रूप से जोड़े जाने वाले बाज़ारों में पतंग, मांझे और सजावटी लाइटें खरीदने वालों की आवाजाही से रौनक रही। हर गुजरते लम्हे के साथ लोगों का उत्साह देखने वाला था। पंजाब की सूचना मंत्री अज़्मा बुख़ारी ने कहा कि बसंत के लौट आने से लोगों का उत्साह भी लौट आया है। इससे लाहौर में उत्सव का माहौल बन गया है जो न सिर्फ पाकिस्तानियों को बल्कि विदेशी सैलानियों को भी आकर्षित कर रहा है। पाकिस्तान के पतंगबाज़ी संगठन के अनुसार, बसंत से व्यापार को भी फायदा हुआ है। अब तक पतंगों और मांझे की बिक्री से दो अरब पाकिस्तानी रुपये (65 करोड़ भारतीय रुपये) की कमाई हो चुकी है।

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