अबू धाबी, 04 फरवरी (वार्ता/शिन्हुआ) रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों ने बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में शांति वार्ता के दूसरे दौर की शुरुआत की।
यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख रुस्तम उमेरोव ने इस त्रिपक्षीय बैठक के शुरू होने की पुष्टि की है। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर इस सर्दियों का सबसे भीषण हमला किया है। वार्ता का यह दौर खासतौर पर ऐसे जटिल मुद्दों पर केंद्रित है, जो शांति समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बने हुए हैं।
रूस डोनबास (डोनेट्स्क और लुहान्स्क) के साथ-साथ खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों पर अपने पूर्ण नियंत्रण की मांग पर अड़ा है, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने स्पष्ट किया है कि यूक्रेन अपनी एक इंच जमीन भी ‘बिना लड़े’ नहीं छोड़ेगा। साथ ही यूक्रेन भविष्य में रूसी आक्रमण को रोकने के लिए पश्चिमी देशों से ठोस सुरक्षा गारंटी चाहता है, जबकि रूस, यूक्रेन की नाटो सदस्यता और पश्चिमी सैनिकों की तैनाती का कड़ा विरोध कर रहा है।
ट्रंप प्रशासन इस जंग को खत्म करने के लिए मध्यस्थता के प्रयासों में तेजी ला रहा है। बुधवार की बैठक में अमेरिकी दूत स्टीव विटकोफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हुए। इससे पहले श्री विटकोफ ने रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ फ्लोरिडा में हुई मुलाकात को ‘उत्पादक’ बताया था। अमेरिका का मानना है कि दोनों पक्ष शांति लाने के इच्छुक हैं, लेकिन ‘क्षेत्रीय समाधान’ अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
यूक्रेन का आरोप है कि रूस ने वार्ता से ठीक पहले 450 ड्रोन और 71 मिसाइलों से उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर ‘आतंकित करने की रणनीति” अपनाई है। श्री जेलेंस्की के अनुसार, इन हमलों ने उस ‘ऊर्जा संघर्ष विराम’ का उल्लंघन किया है जिस पर सहमति बनी थी। यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल
ने संकेत दिया है कि इन ताज़ा हमलों के बाद वे अपनी बातचीत की स्थिति और शर्तों में बदलाव कर सकते हैं।
बैठक में दोनों पक्षों की ओर से सैन्य और खुफिया प्रमुखों की मौजूदगी दर्शाती है कि कूटनीतिक चर्चा के साथ-साथ जंग की हकीकत और सुरक्षा प्रबंधों पर गहरा ध्यान दिया जा रहा है।
