
जबलपुर। छतरपुर में बड़े पैमाने में हुए माइनिंग घोटाले को जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दायर मामले में सीबीआई जांच पर बल दिया गया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् खनिज स्रोत विभाग के सचिव, मप्र स्टेट माइनिंग कारपोरेशन के एमडी, कलेक्टर छतरपुर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
यह जनहित याचिका छतरपुर की ग्राम पंचायत भैरा के सरपंच शिवराम दीक्षित व दिलीप सिंह की ओर से दायर की गई है। जिनकी ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अनूपपुर की किसान मिनरल्स प्रायवेट लिमिटेड ने स्टेट माइनिंग कारपोरेशन के साथ 2007 में संयुक्त समझौता किया था। इसके तहत कंपनी को हर साल रायल्टी और डेवलपमेंट फीस जमा करनी थी। वर्ष 2021 में जांच के बाद कंपनी पर 19 करोड़ रुपये की रायल्टी निकाली। यह दलील दी गई कि शर्त के अनुसार कंपनी ने बैंक गारंटी के रूप में एफडी भी जमा नहीं की है। इसके बाद वर्ष 2024 में भी एक जांच हुई, जिसे दबा दिया गया। याचिका में मांग की गई कि इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी सीबीआई से जांच कराई जाए। क्योकि हकीकत में रायल्टी चोरी महज 19 करोड़ नहीं बल्कि 30 हजार करोड़ है। संबंधित विभाग के अधिकारियों का रवैया जांच का विषय है। कुल मिलाकर मिलीभगत से गड़बड़ी हुई है, जिस पर पर्दा डाला जा रहा है। मामले की सुनवाई पश्चात न्यायालय ने अनावेदकों को जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
